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Sanskrit presention

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A beautiful ppt.on sanskrit grammer.....EASY TO UNDERSTAND

Publicada em: Educação

Sanskrit presention

  1. 1. समास
  2. 2. समास के प्रकार  बहुव्रीहह समास  व्दंव्द समास  अव्ययीभाव समास्
  3. 3. बहुव्रीहह समास जिस समास मे पदो के अर्थ को छोडकर ककसी और पद के अर्थ की प्रधानता होती है, उसे बहुव्रीहह समास कहते है इस समास मे कोई भी पद प्रधान नही होता इसके पदो से ककसी और का बोध होता है अत: ववग्रह भी उसी अर्थ के अनुसार करना चाहहए
  4. 4. इस समास के बहुत से उधारन है पीताम्बरा: पीतानन अम्बराणि यस्य: स: नष्टशजतत: नष्टा शजतत: यस्मात स: ववमलमनत: ववमला मनत: यस्य: स: नीलकण्ठ: नील: कण्ठ: यस्य: स: लम्बोदर: लम्बम उदरम यस्य: स: महात्मा महान आत्मा यस्य स: समस्तपद के अर्थ के अनुसार दोनो पदो के बाद यत और तत शब्दो को तीनो ललगंों प्रर्मा ववभजतत को छोड्कर सभी ववभजततयो और सभी वचनों में प्रयोग हो सकता है
  5. 5. व्दंव्द समास जिस समास में सभी पद प्रधान हों, उसे व्दंव्द समास कहते हैं इसके तीन भेद होते है • इतरेतर • समाहर • एकशेष
  6. 6. इतरेतर व्दंव्द इसमे प्रत्येक पद स्वतंत्र होता है प्रत्येक पद के बाद च िुडा होता है सम्स्तपद का वचन पदों की संख़्या के अनुसार होता है िैसे- कृष्िािुथनौ कृष्ि: च अिुथन: च मातावपतरौ माता च वपता च सीतारामौ सीता च राम: च हररहरौ हरर: च हर: च
  7. 7. समाहार व्दंव्द इसमे समस्तपद प्रर्मा ववभजतत नपुंसकललग, एकवचन वाला बन िाता है यह समूह अर्थ मेंआता है िैसे- चराचरम चर: च अचर: च एतयो: समाहार: सपथनकुलम सप:थ च नकुल: च ्एतेषां समाहार: शीतोष्िम शीतं च उष्िं च एतयो: समाहार:
  8. 8. एकशेष व्दंव्द इसमे जिन पदो में व्दंव्द समास होता है, उनमे एक पद ही शेष रह िाता है िैसे- पपतरौ माता च पपता च हंसौ हंसी च हंस: च चटकौ चटका च चटक़: च भ्रातरौ भगिनी च भ्राता च
  9. 9. अव्ययीभाव समास अव्यय उन शब्दों हैं जिनके ललगं, वचन आहद के अनुसार रुप नहहं बदलते जिस समास के समस्तपद में पहला पद अव्यय हो और समस्तपद भी अव्यय बन िए, उस समास को अव्ययीभाव समास कहते हैं िैसे कृष्िस्य समीपे = उपकृण्षम यहॅं उपकृष्िम में पहला अंश उप उपसगथ अव्यय हैं
  10. 10. पाठयक्रम में ननधाथररत अव्ययीभाव के उदाहरि इस प्रकार हैं पश्चात अर्थ में अनु उपसगथ का प्रयोग अनुरर्म रर्स्य पश्चात अनुववष्िु ववष्िो: पश्चात समीप अर्थ में उप उपसगथ का प्रयोग उपकृष्िम कृष्िस्य समीपे उपवनम वनस्य समीपे उपगंगम गंगाया: समीपे उपयमुनम यमुनाया: समीपे
  11. 11. उपनदम नद्या: समीपे उपसाधु साधो: समीपे सहहत अर्थ में स उपसगथ का प्रयोग सचचत्रम चचत्रेि सहहतम् साश्चयथम आश्चयेि सहहतम् साट्टहासम अट्टहासेन सहहतम् अभाव अर्थ में ननर उपसगथ का प्रयोग ननिथनम िनानाम अभाव: ननववथघ्नम ववघ्नानाम अभाव: ननमुथलम मूलस्य अभाव:
  12. 12. वीप्सा के अर्थ में प्रनत उपसगथ क प्रयोग प्रनतगृहम गृहं गृहम प्रनतवनम वनं वनम प्रनतहदनम हदनं हदनम  अननतक्रमि अर्थ में यर्ा अव्यय का प्रयोग यर्ाबालम बलम अननतक्रम्य यर्ारीनत रीनतम अननतक्रम्य यर्ाववचध ववचधम अननतक्रम्य
  13. 13. यर्ाकालम कालम अननतक्रम्य यर्ेच्छम इच्छाम अननतक्रम्य यर्ाननयमम ननयमम अननतक्रम्य
  14. 14. सचचन वैभव कक्षा- x-D

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