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अन्योन्याश्रय ? (एक दूजे के लिए ?)
- नमस्ते / प्रणाम – शान्ता शमाा
कहते हैं, सूरज उगता तो ददन ननकिता है !
बताओ तो, क्या दद...
कहते हैं, कक महासागर हैं, िहरों को आश्रय देते हैं !
बताओ तो, क्या िहरों के न होने से सागर मर जाते हैं ?
(क्या िहरें अन्य ज...
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अन्योन्याश्रय

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Poem explaining interdependence with hidden meaning

Publicada em: Arte e fotografia
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अन्योन्याश्रय

  1. 1. अन्योन्याश्रय ? (एक दूजे के लिए ?) - नमस्ते / प्रणाम – शान्ता शमाा कहते हैं, सूरज उगता तो ददन ननकिता है ! बताओ तो, क्या ददन ननकिने से सूरज न उगता है ? कहते हैं, रात आने पर अन्धेरा छाता है ! बताओ तो, क्या अन्धेरा छाने पर रात न होती है ? चन्र के घटने-नघसने से अमावास्या पड़ती है ! बताओ तो, अमावास्या के आने से चााँद न ओझि होता है ? कहते हैं, तुम्हें सुनाने ही मैं बोिा करती हूाँ ! बताओ तो, क्या तुम न सुनते तो मैं न बोिती ? कहते हैं, हम जीने के लिए ही खाते हैं ! बताओ तो, क्या खाने के लिए िोग न जीते हैं ? कहते हैं, कि की आशा िेकर ही सब जीते हैं ! बताओ तो, क्या ननराश िोग जीते नहीीं हैं ? कहते हैं, ‘हााँ’ के अस्स्तत्व से ‘न’ का जन्म होता है ! बताओ तो, क्या ‘न’ की उपस्स्िनत से ‘हााँ’ की अनुपस्स्िनत न होती है ? कहते हैं, हवा चिती है तो पत्ते दहिते हैं ! बताओ तो, क्या पत्तों के दहिने से हवा न चिती है ? कहते हैं, कक अच्छाई है तभी बुराई भी जनमती है ! बताओ तो, क्या बुराई नहीीं होती तो अच्छाई भी न होती ? कहते हैं, अशास्न्त की मौजूदगी में शास्न्त लमट जाती है ! बताओ तो, क्या शास्न्त की मौत पर अशास्न्त न पैदा होती है ?
  2. 2. कहते हैं, कक महासागर हैं, िहरों को आश्रय देते हैं ! बताओ तो, क्या िहरों के न होने से सागर मर जाते हैं ? (क्या िहरें अन्य जिाशय में न जीववत रहती हैं ?) ---------------- X -----------------

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