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PrashantTripathi: विधियों की सीमा

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PrashantTripathi: विधियों की सीमा

  1. 1. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : जपुजी साहिब की मूलवाणी 'जपुजी' जगतगुरु द्वारा जनकल्याण हेतु उच्चाररत की गई अमृतमयी वाणी ह। अपनी ववविष्ट भाषा और सिक्त िली के माध्यम से गुरुजी ने 'जपुजी' में और उसकी सनातन खोज संबंधी उच्च बौविक एवं अमूतत ववचारों को स्पष्ट एवं सिक्त रूप में अवभव्यक्त वकया ह। स्रोत : जप जी साहिब
  2. 2. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : चुपैचुप ना होवई जे लाइ रहा ललव तार जपुजी साहिब(पौड़ी १) अनुवाद मौन धारण करने से मन चुप निीं िोता और ना िी प्रभु से हमलाप िोता िै चािे मन लगातार ध्यान में लगा रिे!
  3. 3. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें :
  4. 4. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें :
  5. 5. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : हमको लगता है
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  9. 9. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : हमको लगता है
  10. 10. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : जब हमको अपने “व्यापार” की लनष्फलता लिख जाती है तो हम आत्मा को “पाना” चाहतेह
  11. 11. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : बड़ी होशियारी है न हमारी
  12. 12. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : बड़ी होशियारी है न हमारी
  13. 13. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : बड़ी होशियारी है न हमारी
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  15. 15. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : बड़ी होशियारी है न हमारी
  16. 16. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : िमको लगता िै
  17. 17. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : िमको लगता िै
  18. 18. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : िमको लगता िै
  19. 19. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : शिर हम नई दौड़ में लग जाते हैं
  20. 20. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : शिर हम नई दौड़ में लग जाते हैं ज्ञान दौड़ में
  21. 21. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : शिर हम नई दौड़ में लग जाते हैं ज्ञान दौड़ में
  22. 22. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : शिर हम नई दौड़ में लग जाते हैं ज्ञान दौड़ में
  23. 23. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : हम रूप बदलने को तैयार हैं पर शिसशजित होने को तैयार नहीं है
  24. 24. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : हम रूप बदलने को तैयार हैं पर शिसशजित होने को तैयार नहीं है
  25. 25. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : हम रूप बदलने को तैयार हैं पर शिसशजित होने को तैयार नहीं है
  26. 26. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : संत में और िम में यिी अंतर िै
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  35. 35. prashantadvait.com advait.org.in पूरा लेख पढ़ें : संत इन मूर्िताओंमें नहीं िं सते िो कहते हैं
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  42. 42. वक्ता
  43. 43. जीिन-सम्बंशित िातािओंएिं व्याख्यानों में संलग्न। िेदांत एिं सभी समयों एिं स्थानों के आध्याशममक साशहमय पर प्रिचन देना भी अमयशिक शप्रय। उनके िचनों ने एक शिशिष्ट बोि-साशहमय को जन्म शदया है। (www.prashantadvait.com) अद्भुत हैं अशस्तमि के तरीके । आइआइटी और आइआइऍम से प्रौद्योशगकी और प्रबंिन की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात्, और शिशभन्न उद्योगों में कु छ समय के उपरान्त, समयातीत की सेिा की ओर उन्मुर् हुए।
  44. 44. श्री प्रशाांत के साथ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में आयोहजत हकये जाते िैं रहििार सुबि 10:00 एिं बुधिार शाम 07:00 बजे सभी का स्वागत है! इस एिं ढेरों अन्य हिहियो की प्रहतहिहप पढ़ने के हिए सदस्य बनें @

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