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बस बेहोश बहाव
प्रस्तुतत: अनु
श्री प्रशाांत के व्याख्यान:
‘बस बेहोश बहाव’ पर आधाररत
मैं हमेशा
दुतवधा
में क्यों रहता ह? ?
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एक नाव है।
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एक नाव है।
और उसका जो नातवक है,
वो सो रहा है।
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नाव अब पूरी तरह से
लहरों के हवाले है।
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यह सोते हुए नातवक हो तुम!
और तुम्हारा जीवन है -
एक बेहोश बहाव!
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जाग जाओ!
और
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दुतवधाका
एकही कारण होता है।
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तुमआशाओांसे
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उम्मीदों से
छतवयों
से
कल्पनाओां
से
पहचानों से
तवचारों से
भतवष्य
की प्लातनांग से
पूरा लेख पढ़...
तुम ध्यान
से देख
नहीं
रहे हो,
इसतलए
दुतवधा में हो।
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तुम
वास्ततवकता से
बहुत दूर,
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तातक तुम
वास्ततवकता के
पास आ सको ।
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यह प्रस्तुतत तनम्नतलतखत
लेख का अांश है:
“ बस बेहोश बहाव ”
तक्लक करें
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बस बेहोश बहाव
(श्री प्रशाांत – उद्गार मौन के )
पूरे...
अद्वैत लाइफ-एजुके शन सांस्था के मागगदशगकवसांचालक।
उनके नेतृत्व में तहमालय की गोद में आयोतजत
बोध तशतवरों में कालातीत
बोध-सा...
जीवन-सम्बांतधत वातागओां एवां व्याख्यानों में
सांलग्न। वेदाांत एवां सभी समयों एवां स्थानों के
आध्यातत्मक सातहत्य पर प्रवचन ...
श्री प्रशाांत के साथ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में
आयोतजत तकये जाते हैं।
रतववार सुबह ९.०० बजे और
बुधवार शाम ७:०० बजे
सभी...
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Prashant Tripathi: बस बेहोश बहाव

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Following presentation is an excerpt from discourse given by Shri Prashant on behalf of Advait Life-Education at NIET, Greater Noida on 5th April, 2012.

Clarity sessions are held at Advait office every Sunday 10.00 am.
All are welcome!

Advait Learning camps in Himalayas, led by Shri Prashant, are organised at regular intervals. To participate, contact 0120-4560347.

www.advait.org.in
Twitter: Prashant_Advait
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FB: facebook.com/prashant.advait
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Publicada em: Espiritual
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Prashant Tripathi: बस बेहोश बहाव

  1. 1. बस बेहोश बहाव प्रस्तुतत: अनु श्री प्रशाांत के व्याख्यान: ‘बस बेहोश बहाव’ पर आधाररत
  2. 2. मैं हमेशा दुतवधा में क्यों रहता ह? ? पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  3. 3. कै से पहचानू तक अच्छा क्या है? पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  4. 4. कै से पहचानू तक अच्छा क्या है? पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in बुरा क्या है?
  5. 5. कै से पहचानू तक अच्छा क्या है? पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in बुरा क्या है? गलत क्या है?
  6. 6. कै से पहचानू तक अच्छा क्या है? पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in बुरा क्या है? गलत क्या है? सही क्या है?
  7. 7. hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  8. 8. आओ, ध्यान से देखें, तक चल क्या रहा है! hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  9. 9. आओ, ध्यान से देखें, तक चल क्या रहा है! hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  10. 10. एक नाव है। hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  11. 11. एक नाव है। और उसका जो नातवक है, वो सो रहा है। hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  12. 12. एक नाव है। और उसका जो नातवक है, वो सो रहा है। Z Z hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव Z Z
  13. 13. नाव अब पूरी तरह से लहरों के हवाले है। hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  14. 14. यह सोते हुए नातवक हो तुम! और तुम्हारा जीवन है - एक बेहोश बहाव! hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  15. 15. यह सोते हुए नातवक हो तुम! और तुम्हारा जीवन है - एक बेहोश बहाव! hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  16. 16. तो पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  17. 17. जाग जाओ! hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
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  20. 20. क्योंतक पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  21. 21. दुतवधाका एकही कारण होता है। पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  22. 22. दुतवधाका एकही कारण होता है। पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  23. 23. तक तुम ध्यान को उपलब्ध नहीं हो। hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  24. 24. मतलब पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  25. 25. तक तुम तिरे हुए हो पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम
  26. 26. तक तुम तिरे हुए हो पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम
  27. 27. तक तुम तिरे हुए हो पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम तवचारों से
  28. 28. आशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम तवचारों से
  29. 29. आशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम तवचारों से कल्पनाओां से पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  30. 30. आशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम तवचारों से कल्पनाओां से पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव छतवयों से
  31. 31. आशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम तवचारों से कल्पनाओां से पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव छतवयों से पहचानों से
  32. 32. आशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो hindi.prashantadvait.com | advait.org.in तुम तवचारों से कल्पनाओां से पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव छतवयों से पहचानों से उम्मीदों से
  33. 33. तुमआशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो उम्मीदों से छतवयों से कल्पनाओां से पहचानों से तवचारों से भतवष्य की प्लातनांग से पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  34. 34. तुम ध्यान से देख नहीं रहे हो, इसतलए दुतवधा में हो। पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  35. 35. तुम ध्यान से देख नहीं रहे हो, इसतलए दुतवधा में हो। पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  36. 36. तुम वास्ततवकता से बहुत दूर, छतवयों में जी रहे हो, इसतलए दुतवधा में हो। पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  37. 37. तुम वास्ततवकता से बहुत दूर, छतवयों में जी रहे हो, इसतलए दुतवधा में हो। पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  38. 38. तुमआशाओांसे तक तुम तिरे हुए हो उम्मीदों से छतवयों से कल्पनाओां से पहचानों से तवचारों से भतवष्य की प्लातनांग से पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव hindi.prashantadvait.com | advait.org.in इन सब से पीछा छु ड़ाओ!
  39. 39. तातक तुम वास्ततवकता के पास आ सको । hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  40. 40. तातक तुम वास्ततवकता के पास आ सको । hindi.prashantadvait.com | advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के तलये बस बेहोश बहाव
  41. 41. यह प्रस्तुतत तनम्नतलतखत लेख का अांश है: “ बस बेहोश बहाव ” तक्लक करें @ बस बेहोश बहाव (श्री प्रशाांत – उद्गार मौन के ) पूरे लेख को पढ़ने के तलए hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  42. 42. अद्वैत लाइफ-एजुके शन सांस्था के मागगदशगकवसांचालक। उनके नेतृत्व में तहमालय की गोद में आयोतजत बोध तशतवरों में कालातीत बोध-सातहत्य का जन्म हो रहा है। लेखक, तशक्षक, उपक्रमी और इन सब के पार। hindi.prashantadvait.com | advait.org.in
  43. 43. जीवन-सम्बांतधत वातागओां एवां व्याख्यानों में सांलग्न। वेदाांत एवां सभी समयों एवां स्थानों के आध्यातत्मक सातहत्य पर प्रवचन देना भी अत्यतधक तप्रय। उनके वचनों ने एक तवतशष्ट बोध-सातहत्य को जन्म तदया है । (www.prashantadvait.com) (http://hindi.prashantadvait.com/) अद्भुत हैं अतस्तत्व के तरीके । आइआइटी और आइआइऍम से प्रौद्योतगकी और प्रबांधन की तशक्षा प्राप्त करने के पश्चात्, और तवतभन्न उद्योगों में कु छ समय के उपरान्त, समयातीत की सेवा की ओर उन्मुख हुए ।
  44. 44. श्री प्रशाांत के साथ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में आयोतजत तकये जाते हैं। रतववार सुबह ९.०० बजे और बुधवार शाम ७:०० बजे सभी का स्वागत है! इस एवां ढेरों अन्य वीतडयो की प्रतततलतप पढ़ने के तलए सदस्य बनें (सब्सक्राइब करें – कोई शुल्क नहीं) www.youtube.com/c/PrashantTripathi01 www.youtube.com/c/ShriPrashant www.pinterest.com/prashantekarshi/ soundcloud.com/shri-prashant-tripathi http://hindi.prashantadvait.com https://www.mixcloud.com/Shri_Prashant_tripathi/

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