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निडर होकर जािो
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श्री प्रशाांत के ...
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मैं
क्या
हूँ?
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तुम वही हो,
जो तुम सुबह से शाम तक कर रहे हो;
जो तुम्हारी पूरी दिनचर्ाा है
पूरे ले...
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तुम उससे अलग कु छ नहीं हो
उससे अलग तुम अपने बारे में जो भी
सोचते हो, वो लसर्फ कल्...
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अगर तुम सुबह से शाम तक डर में हो,
और तुम िावा करो
– ‘मैं बहािुर हूँ’ –
और दिन भर ...
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अगर मैं डर में जीता हूँ,
तो मैं लया हूँ?
डरपोक
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तो मैं लया हूँ?
डरपोक
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मैं सुबह से शाम तक
कर क्या रहा हूँ?
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क्या मैं होश
में हूँ?
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जब तुम अपने लिन को ध्यान से िेखोगे,
तो लिखाई पड़ेगा लक लिन का बहुत सारा
समय तो लर्...
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जब तुम अपने लिन को ध्यान से िेखोगे,
तो लिखाई पड़ेगा लक लिन का बहुत सारा
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जब तुम अपने लिन को ध्यान से िेखोगे,
तो लिखाई पड़ेगा लक लिन का बहुत सारा
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और जो कभी
ध्यान से न देखे,
वो क्या है?
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या तो वो अंधा है,
या लर्र ज़बिफस्ती
अपनी आूँखें बंि करके
बैठा है
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क्योंकि जब मैं देख सिता हूँ कि िचरा है, तो मैं सफाई भी
िर सिता हूँ
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बीमार
तो
ननन्यानवे
प्रनतशत
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पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
पर वो
जानते
भी नहीं
नक वो
बीमार ...
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तुम
उनसे
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ननकल
गए
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तुमने
कु छ
पता
कर
नलया
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तुमने कहा था
लक सत्य मेरा
नुकसान...
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लक सत्य मेरा
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यह प्रस्तुदत दनम्नदिदित िेि का अंश है:
“निडर होकर जािो?”
दलिक करें
@
निडर होकर जािो
(श्री प्रशाांत – Words into Silence)
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दलिक करें
अगिी स्िाइड पर, पूरा वीदडयो
िेिने के दिए
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पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक क...
िेिक दशक्षक उपक्रमी,
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अद्वैत िाइफ-एजुके शन संस्थाके
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उनके नेतृत्व में, दहमािय की गोि में
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िीवन-सम्बंदधत वातागओं एवं व्याख्यानों में संिग्न। वेिांत एवं
सभी समयों एवं स्थानों के आध्यादत्मक सादहत्य पर प्रवचन िेना
भी...
RS 06.07.15
श्री प्रश ांत के साथ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में
आयोदित दकये िाते हैं
रदववार सुबह ९.३० एवं बुधवार शाम ६.३०...
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Prashant Tripathi: निडर होकर जानो

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Following presentation is an excerpt from discourse given by Shri Prashant at ABES, Ghaziabad on 27th August, 2013

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Publicada em: Espiritual
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Prashant Tripathi: निडर होकर जानो

  1. 1. निडर होकर जािो www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो श्री प्रशाांत के व्याख्यान “निडर होकर जािो” पर आधाररत प्रस्तुलत: ऋचा सहाय
  2. 2. www.advait.org.in www.prashantadvait.com मैं क्या हूँ? पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  3. 3. www.advait.org.in www.prashantadvait.com तुम वही हो, जो तुम सुबह से शाम तक कर रहे हो; जो तुम्हारी पूरी दिनचर्ाा है पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  4. 4. www.advait.org.in www.prashantadvait.com तुम उससे अलग कु छ नहीं हो उससे अलग तुम अपने बारे में जो भी सोचते हो, वो लसर्फ कल्पना है पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  5. 5. www.advait.org.in www.prashantadvait.com अगर तुम सुबह से शाम तक डर में हो, और तुम िावा करो – ‘मैं बहािुर हूँ’ – और दिन भर तुम डरे-डरे घूमते हो, पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  6. 6. www.advait.org.in www.prashantadvait.com अगर मैं डर में जीता हूँ, तो मैं लया हूँ? डरपोक पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  7. 7. www.advait.org.in www.prashantadvait.com अगर मैं डर में जीता हूँ, तो मैं लया हूँ? डरपोक पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  8. 8. www.advait.org.in www.prashantadvait.com मैं सुबह से शाम तक कर क्या रहा हूँ? पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  9. 9. www.advait.org.in www.prashantadvait.com क्या मैं होश में हूँ? पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  10. 10. www.advait.org.in www.prashantadvait.com जब तुम अपने लिन को ध्यान से िेखोगे, तो लिखाई पड़ेगा लक लिन का बहुत सारा समय तो लर्ज़ूल ही जाता है पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  11. 11. www.advait.org.in www.prashantadvait.com जब तुम अपने लिन को ध्यान से िेखोगे, तो लिखाई पड़ेगा लक लिन का बहुत सारा समय तो लर्ज़ूल ही जाता है एक बात और भी लिखाई पड़ेगी लक तुम अपने लिन को कभी ध्यान से िेखते ही नहीं पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  12. 12. www.advait.org.in www.prashantadvait.com जब तुम अपने लिन को ध्यान से िेखोगे, तो लिखाई पड़ेगा लक लिन का बहुत सारा समय तो लर्ज़ूल ही जाता है एक बात और भी लिखाई पड़ेगी लक तुम अपने लिन को कभी ध्यान से िेखते ही नहीं पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  13. 13. www.advait.org.in www.prashantadvait.com और जो कभी ध्यान से न देखे, वो क्या है? पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  14. 14. www.advait.org.in www.prashantadvait.com या तो वो अंधा है, या लर्र ज़बिफस्ती अपनी आूँखें बंि करके बैठा है पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  15. 15. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  16. 16. www.advait.org.in www.prashantadvait.com क्योंकि जब मैं देख सिता हूँ कि िचरा है, तो मैं सफाई भी िर सिता हूँ बेख़ौफ़ होकर बोलो, जो भी ददखता है क्योोंदक, वो यही दसद्ध करेगा दक तुम देख पा रहे हो। पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  17. 17. www.advait.org.in www.prashantadvait.com क्योंकि जब मैं देख सिता हूँ कि िचरा है, तो मैं सफाई भी िर सिता हूँ बेख़ौफ़ होकर बोलो, जो भी ददखता है क्योोंदक, वो यही दसद्ध करेगा दक तुम देख पा रहे हो। आज भी अगर जान जाओ लक तुम बीमार हो तो तुम उनसे तो बेहतर हो, जो बीमार हैं पर जानते नही हैं। लयोंलक अब तुम्हारा इलाज संभव है। पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  18. 18. www.advait.org.in www.prashantadvait.com क्योंकि जब मैं देख सिता हूँ कि िचरा है, तो मैं सफाई भी िर सिता हूँ बेख़ौफ़ होकर बोलो, जो भी ददखता है क्योोंदक, वो यही दसद्ध करेगा दक तुम देख पा रहे हो। आज भी अगर जान जाओ लक तुम बीमार हो तो तुम उनसे तो बेहतर हो, जो बीमार हैं पर जानते नही हैं। लयोंलक अब तुम्हारा इलाज संभव है। जो जानता ही नहीीं है कि वो बीमार है, उसिा इलाज िभी हो ही नहीीं सिता। पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  19. 19. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो बीमार तो ननन्यानवे प्रनतशत लोग हैं
  20. 20. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो पर वो जानते भी नहीं नक वो बीमार हैं
  21. 21. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुम उनसे आगे ननकल गए
  22. 22. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कु छ पता कर नलया
  23. 23. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  24. 24. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कहा था लक सत्य मेरा नुकसान कर िेगा
  25. 25. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कहा था लक सत्य मेरा नुकसान कर िेगा सत्य लकसी का नुकसान नहीं करता
  26. 26. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कहा था लक सत्य मेरा नुकसान कर िेगा पर वो सत्य होना चाहहए सत्य लकसी का नुकसान नहीं करता
  27. 27. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कहा था लक सत्य मेरा नुकसान कर िेगा सत्य लकसी का नुकसान नहीं करता पर वो सत्य होना चाहहए अपनी आूँखों से िेखा हुआ होना चालहए
  28. 28. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कहा था लक सत्य मेरा नुकसान कर िेगा सत्य लकसी का नुकसान नहीं करता पर वो सत्य होना चाहहए वो लिर लकसी का नुकसान नहीं करता अपनी आूँखों से िेखा हुआ होना चालहए
  29. 29. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो तुमने कहा था लक सत्य मेरा नुकसान कर िेगा सत्य लकसी का नुकसान नहीं करता पर वो सत्य होना चाहहए वो लिर लकसी का नुकसान नहीं करता अपनी आूँखों से िेखा हुआ होना चालहए लबल्कु ल लनडर होकर रहो
  30. 30. यह प्रस्तुदत दनम्नदिदित िेि का अंश है: “निडर होकर जािो?” दलिक करें @ निडर होकर जािो (श्री प्रशाांत – Words into Silence) पूरे लेख को पढ़ने के ललए www.advait.org.in www.prashantadvait.com
  31. 31. दलिक करें अगिी स्िाइड पर, पूरा वीदडयो िेिने के दिए www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें निडर होकर जािो
  32. 32. िेिक दशक्षक उपक्रमी, और इनसबके पार अद्वैत िाइफ-एजुके शन संस्थाके मागगिशगक,संचािक उनके नेतृत्व में, दहमािय की गोि में आयोदित बोध दशदवरों में,कािातीत बोध-सादहत्य का िन्महो रहा है श्री प्रशाांत वक्ता www.advait.org.in
  33. 33. िीवन-सम्बंदधत वातागओं एवं व्याख्यानों में संिग्न। वेिांत एवं सभी समयों एवं स्थानों के आध्यादत्मक सादहत्य पर प्रवचन िेना भी अत्यदधक दप्रय। उनके वचनों ने एक दवदशष्ट बोध-सादहत्य को िन्म दिया है। (www.prashantadvait.com) अद्भुत हैं अदस्तत्व के तरीके। आइआइटी और आइआइऍम से प्रौद्योदगकी और प्रबंधन की दशक्षा प्राप्त करने के पश्चात्, और दवदभन्न उद्योगों में कुछ समय के उपरान्त, समयातीत की सेवा की ओर उन्मुि हुए।
  34. 34. RS 06.07.15 श्री प्रश ांत के साथ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में आयोदित दकये िाते हैं रदववार सुबह ९.३० एवं बुधवार शाम ६.३० बिे सभी क स्व गत है! इस एवं ढेरों अन्य दवदडयो की प्रदतदिदप पढ़ने के दिए सदस्य बनें (सब्सक्राइब करें – कोई शुल्क नहीं) @ www.prashantadvait.com www.mixcloud.com/Shri_Prashant_Tripathi

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