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Prashant Tripathi: अपने मालिक आप

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Following presentation is an excerpt from discourse given by Shri Prashant on behalf of Advait Life-Education at AKGEC, Ghaziabad on 2nd February, 2013.

Clarity sessions are held at Advait office every Sunday 10.00 am and Wednesdays at 7.00 pm. All are welcome!

Advait Learning camps in Himalayas, led by Shri Prashant, are organised at regular intervals. To participate, contact 0120-4560347.

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Prashant Tripathi: अपने मालिक आप

  1. 1. अपने मालिक आप www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप श्री प्रशाांत के व्याख्यान “निडर होकर जािो” पर आधाररत प्रस्तुतत: ऋचा सहाय
  2. 2. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप मन में लिचार बाहर से आते हैं, बाहरी प्रभाि के फलस्िरूप कोई भी लिचार पूर्णतया आंतररक तो हो नहीं सकता …
  3. 3. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप तो तिचारों का करें क्या?
  4. 4. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप
  5. 5. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप पूर्णतया बाहरी पर आश्रित होता है
  6. 6. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप उसका अपना कुछ नहीं है, वो जो पाता है बाहरसे ही पाता है
  7. 7. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप पर क्या तुम मात्र मन हो?
  8. 8. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप क्या मन के अलािा तुम्हारा कोई और अतस्तत्ि नहीं?
  9. 9. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप जो भी तुम देखोगे जो भी तुम सुनोगे जो भी जानकारी तुम एकलित करोगे
  10. 10. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप िो बाहर से ही आयेगा जो भी तुम देखोगे जो भी तुम सुनोगे जो भी जानकारी तुम एकलित करोगे
  11. 11. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप पर उि सब को समझिे की क्षमता भी क्या बाहर से आयेगी ?
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  21. 21. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप जानकारी बाहर से ही आयेगी पर हम के िल जानकारी ही बाहर से नहीं लेते हम लनर्णय भी बाहर से िे िेते हैं हमें जानकारी (इनफामेशन) और तनर्णय (लिलसजन) का ठीक-ठीक अंतर नहीं पता जानकारी बाहर से लेने में कोई बुराई नहीं है क्योंतक जानकारी बाहर से ही आ सकती है
  22. 22. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप पर हमारे जीवन के लनर्णय क्यों बाहर से आ रहे हैं? शायद
  23. 23. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप शायद वो लनर्णय हमारे अपने लववेक से क्यों नहीं लनकि रहे?
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  26. 26. यह प्रस्तुश्रत श्रनम्नश्रिश्रित िेि का अंश है: “अपिे मानिक आप?” क्लिक करें @ अपिे मानिक आप (श्री प्रश ांत – Words into Silence) पूरे लेख को पढ़ने के ललए www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप
  27. 27. क्ललक करें अगली स्लाइड पर, पूरा वीडडयो देखने के ललए www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए लललक करें अपने मालिक आप
  28. 28. िेिक श्रशक्षक उपक्रमी, और इनसबके पार अद्वैत िाइफ-एजुके शन संस्थाके मार्णदशणक,संचािक उनके नेतृत्व में, श्रहमािय की र्ोद में आयोश्रजत बोध श्रशश्रवरों में,कािातीत बोध-साश्रहत्य का जन्महो रहा है श्री प्रशाांत वक्ता www.advait.org.in
  29. 29. जीवन-सम्बंश्रधत वाताणओं एवं व्याख्यानों में संिग्न। वेदांत एवं सभी समयों एवं स्थानों के आध्याश्रत्मक साश्रहत्य पर प्रवचन देना भी अत्यश्रधक श्रप्रय। उनके वचनों ने एक श्रवश्रशष्ट बोध-साश्रहत्य को जन्म श्रदया है। (www.prashantadvait.com) अद्भुत हैं अश्रस्तत्व के तरीके । आइआइटी और आइआइऍम से प्रौद्योश्रर्की और प्रबंधन की श्रशक्षा प्राप्त करने के पश्चात्, और श्रवश्रभन्न उद्योर्ों में कुछ समय के उपरान्त, समयातीत की सेवा की ओर उन्मुि हुए।
  30. 30. श्री प्रश ांत के साथ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में आयोश्रजत श्रकये जाते हैं रश्रववार सुबह ९.३० एवं बुधवार शाम ६.३० बजे सभी क स्व गत है! इस एवं ढेरों अन्य श्रवश्रियो की प्रश्रतश्रिश्रप पढ़ने के श्रिए सदस्य बनें (सब्सक्राइब करें – कोई शुल्क नहीं) @ www.prashantadvait.com

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