Yogic Shuddhikriya

घंटाली मित्र िंडल, घाटोपर
यपग रदमिोा अभ्यास क्रि
Understanding the Shatkarmas
Definition and Classification
1. What are the Shatkarmas?
2. How are they Classified?
3. What is the support of Kriya?
4. Are there any other kriyas beside these?
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धौमिर्बमतितिथा नेमि लौमलोी त्राटों िथा ।
ोरालभामिश्चैिामन षट्ोिाबमि सिाच ेि् ॥ १ ॥ १२ ॥
dhautirbastistathā neti laulikī trāṭakaṁ tathā |
kapālabhātiścaitāni ṣaṭkarmāṇi samācaret || G.S.1 || 12 ||
Dhauti, Basti, Neti, and Nauli, Trataka, and Kapalabhati, One should
practice these six cleansing techniques regularly
षट्ोिबिा शपधनं च आसनेन भिेद् दृढि्।
िुद्रया मतथ िा चैि प्रत्याहा ेि धैयबिा ॥ १ ॥ १०॥
ṣaṭkarmaṇā śodhanaṁ ca āsanena bhaved dṛḍham |
mudrayā sthiratā caiva pratyāhāreṇa dhairyatā || 1 || 10 ||
Through Shatkarmanas purification of body and through Asanas
firmness, through Mudras steadiness, and through Pratyahara
patience is achieved.
घे ंड संमहिा – Gherand Sanhita
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DHAUTI Antar dhauti
(Internal)
Vatsara (air)
Varisara (shankhaprakshalana)
Vanhisara (agnisara kriya)
Bahishkrita (rectal cleaning)
Danta dhauti
(head)
Dantamoola (teeth)
Jihva (tongue)
Karnarandhra (ears)
Kapalrandhra (frontal sinuses)
Hrid dhauti
(cardiac)
Danda (stick)
Vaman (kunjal, gajakarani & vyaghrakarani
kriya)
Vastra (cloth)
Mool Shodhana (anal)
Prakshalana
BASTI Jala (water)
Sthala (dry)
NETI Jala (water)
Sutra (thread / rubber)
LAULIKI
(NAULI)
Madhyama (middle)
Vama (Left)
Dakshina (right)
Bhramara (abdomen / Naulichalana)
TRATAKA Bahiranga (external)
Antaranga (Internal)
KAPALBHATI Vatakrama (breathing)
Vyutkrama (reversed)
Sheetkrama (cooling)
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ग्रन्थ प्रोा
१. हठयपग प्रदीमरोा 6
२. घे ंड संमहिा 21
३. हठ त्नािली 8
४. षटोिब संग्रह 46
५. प्राििपमशनी 5
६. आयुिेद 5
७. भमिसाग – च िदास 12
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Purpose
1. Should everyone practice?
2. What is the ultimate purpose?
3. What is its role in overall Yoga?
4. What are subtle effects?
5. What is the best way to maintain a healthy
bodily systems?
6. How it helps to increase in capacity?
7. What is its effect on doshas?
8. How does it balance the body?
9. Is it necessary to do it before Pranayama?
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मूल ऊद्देश
कुण्डललनी
शलि जागरण
हाल के समय
में शरीर की
आतंररक शुलि
अशुमियााँ ोौन से ति र उत्रन्न हपिी है
1. Food - खप ाो
2. Breathing - श्वसन
3. Skin - त्िचा
4. ANS - अनुों री – र ानुों री
5. Body Systems - संतथा – अंि:स्त्रािी, प्रमि क्षा, उत्सर्बन, प्रर्नन
6. आि
7. Mental / Emotional Level ोाि, क्रपध, िपह, िद, लपभ, ित्स
8. िृमियााँ, - रिंर्मल िुमन
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Space - आोाश
Air - िायु
Fire - अमनन
Water - र्ल
Earth - रृथ्िी
ोु मरिानां मह दपषािां श ी े रर धाििाि् ।
यत्र संग: ख िैगुण्याि् व्यामधतित्रपरर्ायिे ।।सुश्रुत संहिता 24/10
The prakupita doshas will spread all over the body, where there
is a hindrance dosha will accumulate there and produce disease
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 Increase in Flexibility - श ी ोा लौमचो हपना
 Decrease in Weight - िर्न ोा ोि हपना
 Filling with Vivace - श ी ोा तफू मिब से भ ना
 Decrease in restlessness - िन ोी चंचलिा ोि हपना
 Remove/Reduce Disease - पगपोा ोि हपना/ चला र्ाना
 Change in Attitude - दृमिोपि िें रर ििबन
Does This Happens Overnight ???
क्या ये सर् एो मदन िें संभि है ?
Benefits
1. Is it important for Kundalini awakening
2. Cleanses the internal body
3. Body waste and overall health.
4. Concentration
5. Advanced practices
6. Preparation for Pranayama and meditation
7. Eliminating disease
8. Lengthen the life-span
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‘A State of Complete physical, Mental, Social
and Spiritual Well Being and not merely
Absence of Disease or Infirmity’ - WHO
तिमतिन् मिष्ठमि इमि तितथः।
र्प तियं िें मतथि है िही तितथ है।
आयुिेद
सिदपष: सिामननश्च सिधािुिलमक्रया ।
प्रसन्न आत्िेमन्द्रयिन: तितथ इत्यमभमधयिे ॥ सुश्रुि १५.१० ॥
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So how to achieve the Goal :- Only way is YOGA
यपग :- देहानंद से मदव्यानंद |
देहशुमि→नाडी शुमि →मचि शुमि →मिचा शुमि
By Sivanand Saraswati
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Shatkarmas and Pranamaya Kosha
1. Five koshas of the body
2. Main purpose
3. Waste interfere with Pranic body
4. Shatkarmas affects Pranic body
5. Purifying Nadis
6. Balancing the Nadis
7. Preparation for Pranayama
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Health is integration of all the five
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▪ आनंदिय
▪ मिज्ञानिय
▪ िनपिय
▪ प्राििय
▪ अन्निय
 ोायब - प्रािशमि ोा िहन
 तथान - संरूिब श ी िें, प्राििय ोपषप िें
 संख्या - ७२००० नामियााँ
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प्रिुख नामियााँ –
इडा,
मरंगला,
सुषुम्ना
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प्रमुख नालियााँ, उनका स्थान और संबंलित शुलि लरियया
रिय. प्रमुख नाडी शरीर में स्थान संबंलित शुलिलरियया
१ इडा बाई ंओर कपालभालत, नेलत
२ लपंगला दाई ंओर कपालभालत, नेलत
३ सुषुम्ना मेरुदंड (मध्य मे) कपालभालत, नेलत
४ गांिारी बाएं नेत्र गोलक में त्राटक, कपालभालत
५ हलस्त लजव्हा दाएं नेत्र गोलक में त्राटक, कपालभालत
६ पूषा दायााँ कान कणण रंध्र िौलत
७ यशलस्िनी बायााँ कान कणण रंध्र िौलत
८ अलंबुिा मुख पर लजव्हामूल, दंतमूल, कपालभालत
९ कुट्टू गुदा द्वार बलस्त, गजकरणी, गणेश लरियया
१० शंलखनी मूल स्थान बलस्त, गजकरणी, गणेश लरियया
११ सरस्िती मुख, कं ठ लजव्हामूल, कपाल रंध्र
१२ शलि गुदा द्वार, दाई ंओर बलस्त
१३ िज्र गुदा द्वार, बाई ंओर बलस्त
General Guidelines
1. Ideal environment for practicing Shatkarmas?
2. How should one learn? – Guidance - Guru
3. Should everyone practice to balance doshas?
4. Necessary to change lifestyle when taking up hatha yoga?
5. Are there any restriction on women during menses?
6. What diet should be followed?
7. What is the correct sequence – timing – season?
8. What apparatus needed?
9. Should it be practised before Pranayama?
10. How can it be fitted in busy lifestyle?
11. Awareness
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Yogic Shuddhikriya
The only part of yoga which not only give result
In short time, but it gives result instant.
यह यपग ोा िप महतसा है र्प न मसफ
ब र्ल्दी से रर िाि
लािा है र्मल्ो िु ंि रर िाि लािा है |
िेदश्लेष्िामधोः रूिं षट्ोिाबमि सिाच ेि् ।
अन्यतिु नाच ेिामन दपषािां सिभाििः ॥ २.२१ ॥
meda-śleṣhmādhikaḥ pūrvaṃ ṣhaṭ-karmāṇi samācharet |
anyastu nācharettāni doṣhāṇāṃ samabhāvataḥ || 21 ||
When fat or mucus is excessive, shatkarma: the
six cleansing techniques, should be practised
before (pranayama). Others, in whom the
doshas, i.e. phlegm, wind and bile, are balanced
should not do them.
ोिब षट्ों इदं गपप्यं घटशपधनोा ोि् ।
मिमचत्रगुिसन्धाय रूज्यिे यपमगरुङ्गिैः ॥ २.२३ ॥
karma ṣhaṭkamidaṃ ghopyaṃ ghaṭa-śodhana-kārakam |
vichitra-guṇa-sandhāya pūjyate yogi-pungghavaiḥ || 23 ||
These shatkarmas which effect purification of the
body are secret. They have manifold, wondrous
results and are held in high esteem by eminent
yogis.
षट्ोिबमनगबितथौल्योफदपषिलामदोः ।
प्रािायािं ििः ोु याबदनायासेन मसद््यमि ॥ २.३६ ॥
ṣhaṭ-karma-nirgata-sthaulya-kapha-doṣha-malādikaḥ |
prāṇāyāmaṃ tataḥ kuryādanāyāsena siddhyati || 36 ||
By the six karmas, (shatkarmas), one is freed
from excesses of the doshas. Pranayama can
then be practised and success achieved without
strain.
प्रािायािै ेि सिे प्रशुष्यमन्ि िला इमि ।
आचायाबिां िु ोे षांमचदन्यत्ोिब न संििि् ॥ २.३७ ॥
prāṇāyāmaireva sarve praśuṣhyanti malā iti |
āchāryāṇāṃ tu keṣhāṃchidanyatkarma na saṃmatam || 37 ||
According to some teachers, pranayama alone
removes impurities and therefore they hold
pranayama in esteem and not the other techniques.
Yogic Shuddhikriya
 Means ‘to wash’
 िुखद्वा से िलद्वा ो
(संरूर्ण रचन िागण)
 Alimentary canal,
inner walls of
stomach, intestines
and bowel
 Ears, forehead and
teeth
प्रोा उरप्रोा
• आं धौम १. िा सा २. िार सा ३. िमहिसा (अमननसा )
४. बमिस्ोृ ि्
• दं धौम १.दं िूल २. मिव्िािूल
३. ोर्ण ंध्र ४. ोराल ंध्र
• हृद धौम १. ििन २. िस्त्र ३. दंड ४. व्याघ्रो र्ी
५. गिो र्ी
• िूलशपधन / गर्ेशमक्रया
अह धौम दणह धौम हृणद्धौम िूणलशपधनि्
धौम ं च ुमिणधां ोृ त्िा घटं ोु िणह ु मनिणलि् घे.सं.१.१३
ोफ़ – रचन – उत्सिणन
१. ोाोी िुद्रा २. िायु भक्षर् – ३० से ३५ बा
३. नौली चालन ४. मिसिणन (िुख से या गुदा द्वा से)
लाभ –
१. दूषित वायुओंका षवसर्जन, hyperacidity, heartburn
२. पचन और उत्सर्जन षिया में सुधार
३. कफ़ और षपत्त के रोगों का षनवारण
४. आलस्य में कमी, उत्साह बढ़ता है
Contra: Heart attack in the past २-३ years, or surgery
आं धौम : २. िार सा (शंख प्रक्षालन)
ोायाोल्र
 िार = रानी, सा = आगे स ोाना
 शुमद्ध – िुखिागण से िलिागण
 गुनगुना रानी – २ मगलास – नौलीचालन / ियू ासन
 मिोल्र: ाड़ासन, म यणो ाड़ासन, ोटी चक्रासन,
म यणो भुिंगासन, उद ाोर्णर् (ोौआचाल)
 िर्जयण
१. ह्रदय और षकडनी दोि
२. उच्च रक्तचाप
३. मेडीकल कं डीशन
४. गर्ाजवस्था
आं धौम : २. िार सा (शंख प्रक्षालन)
ोायाोल्र
 लाभ
१. अपचन, कब्ज़, मलावरोध, गैस से छुटकारा
२. बवासीर, नासूर, अंतषडयों की शुषि के षलए उपयुक्त
३. मधुमेह पर उपचारक
४. आंते में मौर्ूद वर्मसज से छुटकारा
५. प्रसन्न आत्मेंषिय मन:
६. शरीर - षदव्य प्रषतर्ावान तेर्स्वी हलका बनता है
 ेि त्त्ि (Usage of Fire Element).
 Practice after mastering Uddiyan
 Technique:
Flapping of Abdominal muscles 10-15 to
100times after exhalation and holding
breath
Benefits (लाभ):
 Gives nice massage to Liver, Spleen,
Pancreas, Stomach
 Improves
◦ Appetite,
◦ Digestion,
◦ Excretion,
◦ Constipated state,
◦ Weight management and
◦ Reproductive functions
Contra-indications
(िर्जयण) :
• High BP,
• Hernia,
• Pregnancy,
• Menstruation,
• Cronic Ailments
िा सा िैसी ोृ म
कृषत: मुख से वायु का उदर में पान करे, षिर उस वायु को डेढ़ घंटे तक पेट मे
धारण षकये रहे । तत्पश्चात् गुदामागज द्वारा बाहर षनकाल दे ।
लाभ:
१. वातसार और वाररसार के र्ैसे ही षकं तु अषधक मात्र में
सामग्री - खैर का रस, वस्त्र से छन्नी षमट्टी / राख / मंर्न, दातून (नीम या
बबूल का), षत्रिला चूणज, टूथपेस्ट
षिया – १. दााँतों को षघसना - दााँतों की सिाई
२. दोहन – तर्जनी या अंगूठे की मदद से मसूड़ों की माषलश करना
लार्:
१. दांत और मसूड़े साि और सुदृढ़ बनते हैं
२. मसूड़ों में रक्ताषर्सरण सुधरता है
३. अन्नपचन में मददगार
४. दााँतो में र्ंतुओ का प्रर्ाव / िैलाव कम होता है
 र्ीर् और इसकी र्ड़ की सिाई
 षिया – १. िामलश - तर्जनी, मध्यमा और अनाषमका की मदद से
र्ीर् की र्ड़ तक माषलश करे
२. दपिन – अंगूठे औ िणनी ोी िदद से
लाभ
१. र्ीर् लचीली बनती है
२. पचन में सुधार
३. खेचरी मुिा की तैयारी
४. अलंबुधा और सरस्वती नाषड़यों की शुषि
 िणनी औ ोमनष्ठ ोी िदद से
 लाभ
१. बाहरी कानों की शुषि
२. नादानुसंधान
३. यशषस्वनी और पूिा नाषड़यों की शुषि
 ोराल = forehead / ललाट, ंध्र = गुिा
 ोृ म – िृदु ालु ोा अंगठे से िदणन / िामलश
 लाभ –
१. कफ़दोि से मुषक्त
२. ज्ञानतंतु उत्तेषर्त
३. अलंबुधा और सरस्वती नाषड़यों की शुषि
ििन
नैसमगणो
आरपआर
प्रयत्नरूिणो
िायु िल
 (ANS) अनैमछिो िर्जिासंस्था र मनयंत्रर्
 नैसमगणो ििन: संिेदना िमत स्ो से
 आंत्रलि : Peristaltic Movement
 प्रम आंत्रलि : Anti Peristaltic Movement
 िर्जयण:
१. उच्च रक्तचाप (उषचत देखर्ाल करके )
२. हृदयरोग, टी.बी.
३. हषनजया
४. आंखों की तकलीि के साथ मधुमेह
 लाभ
१. मनोषनयंत्रण
२. षपत्त और कफ़ दोि से मुषक्त
३. दमा में सुधार
४. पचन में सुधार, बिकोष्टता में कमी
अल्रश्रिी सायफन ोे त्त्ि
रा म्रर ो रद्धम : ोे ल, बे , िल्दी ोे दण्ड, िट िृक्ष ोी िटा
ोृ म : १ से.िी. िपटी, औ ८० से.िी. लंबी ब नली
लाभ:
१. वमन धौषत के सर्ी लार्
२. दमा र्ैसे रोगों पर उपचारक
 िलिल ोा िस्त्र ४ उंगली (८ से.िी.) चौड़ा , १५
िाथ (७ िीट ) लंबा
 ३ सपरान िें ोृ म ो ें |
◦ िस्त्र मनगलना
◦ नौली, उड्मडयान मक्रया
◦ िस्त्र धी े धी े बाि मनोालना
 िर्जयण
१. हायपरटेंशन, ह्रदय षवकार, स्रोक, पेषटटक अल्सर, सूर्न, कमर्ोरी,
बीमारी, गर्ाजवस्था
 लाभ
१. दमा के षवकार पर योगोपचार
२. त्वचा के षवकार , कफ़, षपत्त
३. पचन शषक्त बढाता है
४. कुष्ठरोग
 ििन िैसे िी र ह ु रुो रुो ोे रानी बाि मनोालना
 रेट र दाब, िुख िें ऊँ गली डाले मबना उल्टी ो ने ोी ोल्रना ो ना
 ANS र मनयंत्रर्
 लाभ:
१. वमन के ज्यादातर लार् षमलते है
२. गर्करणी षिया की पूवज तयारी
 उल्टी ोी भािना, ोामडणयाो मस्फं ोट
 एमरनलपमटस िाल्ि एो िी सिय खुल े िै
 अरान िायु गले ो लाना
 लाभ
१. यकृत, टलीहा, अग्नाशय कायजक्षम
२. वमन और व्याघ्रकरणी के ज्यादातर लार् षमलते है
३. शंषखनी नाडी उत्तेषर्त
 लाभ:
१. गुदा द्वार पर रक्ताषर्सरण बढ़ता है
२. मलावरोध में कमी
३. बवासीर, नासूर, अंतषडयों की सुर्न
पर प्रषतबंधक
४. स्नायुओंका मसार्, संवेदनक्षमता
का षवकास
५. कुट्टू नाडी की शुषि
(गुदा द्वा ोा भाग बाि मनोालो उसे रानी से धपना)
लाभ:
१. गुदाद्वार का आरोग्य सुधरता है और वहां की नाषड़यों की छोर सक्षम
होती है
२. अन्तस्त्व की शुषि
३. मल षवसर्जन का षनयंत्रण ऐषच्छक होता है
बमति Basti: Yogic Enema
प्रसन्न आत्िेंमिय िन: |
१. जल बमति या िार बमति
Jala Basti
२. तथल बमति या शुष्ो बमति,िाि
बमति, िायु बमति
Sthala Basti
PROCESS
▪ In the Morning, before breakfast
▪ Utkatasana under water up to waist
▪ Rechak-Nauli Chaalan-Uddiyan
▪ Water flows in due to -ve Pressure
▪ Excretion thr’ abonite pipe
▪ It is the best technique for cleansing the
Large Intestine
बमति Basti: Yogic Enema
CONTRA INDICATIONS
▪ High bp,
▪ Hernia,
▪ Piles problems,
▪ disorder related to digestion,
▪ Should not be done during Cloudy,
Windy or stormy weather
बमति Basti: Yogic Enema
BENIFITS
▪ Constipation, diarrhea, Improves
blood circulation in large intestine
▪ Cures diseases of the bowels
▪ Excess Doshas (tri) are destroyed
▪ Body’s Internal heat reduces
▪ One feels active and dynamic after
Basti
▪ Body Glows, Basti makes body
Beautiful
▪ Mind Purified
बमति Basti: Yogic Enema
NETI- KRIYA :
नेमि मदव्य दृमि प्रदामयनी
नासपमि मश सा द्वा ं |
• Impact on Sapta-path, Eyes, Resp.track
• Regular Breathing, Network of Capillaries
• Nose is Barometer, Olfactory nerves
• Stimulates Ida, Pingala nerve-tips
• Expansion of awareness at subtler level
साधनान्नेमिोाययतय खेच ीमसमििाप्नुयाि् |
ोफ़दपषा मिनष्यमन्ि मदव्यदृमि: प्रजायिे || घे.सं.१.५१||
By Practicing the Neti-Kriya, one obtains Khechari
Siddhi. It destroys the disorders of phlegm and
produces clairvoyance or clear sight
Types of Neti
नेमि
Requirements for जलनेति:
Sterilized: Neti pot.
Lukewarm water, salt,
Rubber catheter for
Sutra Neti
जल सूत्र ( ब )
दुग्थ घृि िेल तििूत्र
बेसण
ब िेसणनेमि
Rubber Vesana Neti
ब नेमि
Rubber Neti
Rubber Neti
• Improves functioning of Pineal and inner skin
• Improves respiratory capacity
• Relief from Sinusitis, rhinitis, Abnormal
growth of nasal bone
• Other benefits same as Jal-neti on cough,
throat, nose and ears
Guidelines for Practice
• Why should it be practiced even when nose is
not blocked?
• Duration and best time?
• How often should neti be can practiced?
• When should neti be avoided?
• What precautions are there for the practice?
• What is the best posture for practicing Jala neti?
• Why is the position of head important when
practicing neti?
• What should be done if the water won’t flow
through the nose?
Guidelines for Practice
• Which nostril is the water poured / catheter
inserted first when practising Neti?
• How should beginners develop the practice of
Sutra neti?
• How are the nostrils dried after jala neti?
• Contra-indicated for
– Tonsillitis, swelling & other throat problems,
– growth in Nostrils
– Perforation in nostrils, Nose bleeding
Benefits of Neti kriya
• Opening and Cleansing of nasal passages
• Increased immunity, reduced sensitivity &
allergy
• Therapy for Infections, Cold, Sinusitis,
cataracts, Migraine, Asthma, Bronchitis
• Infections of the adenoids, polyps and
inflammation of the nasal membrane
• Effects of neti on allergy are remarkable
Benefits of Jala Neti
•Neti is the ENTE practice (Ear, Nose, Throat, Eyes) –
biggest ENT doctor in the world
•Temperature, force and flow of water stimulates the
nerves located in and around nostrils and the upper
throat
•Removes impurities, dust and dirt of mucous
membrane
•Reduces hearing loss and Increases hearing capacity
•Removes Eye-disorders like short-sightedNess,
catarrh,
•Prepares for the practice of Pranayama and Khechari
Mudra
•Destroys the multitude of disease in the region above
the clavicle
१.Uddiyan (नौली ):
• Practice Sulabha Tadagimudra and Uddiyan
before Nauli kriya
• Area: Abdominal cavity
• Use of Space element
(आोाश ित्ि, बाह्य ोु म्भो)
• Technique: Hold breath after
exhalation, expanding chest,
suck abdomen in
• Contra-indicated for High bp,
Menstruation Heart problems
• Benefits: Improves Digestion, Constipation,
improves working and secretion of Adrenal and
other Abdominal Glands
२. िमिसा (अमग्नसा )
• िेज ित्त्ि (Usage of Fire Element).
Practice after mastering Uddiyan
• Technique: Flapping of Abdominal muscles 10-15
to 100times after exhalation and holding breath
Benefits (लाभ):
• Gives nice massage to Liver, Spleen, Pancreas,
Stomach
• Improves Appetite, Digestion, Excretion,
Constipated state, Weight management and
Reproductive functions
Contra-indications (िर्जयय) :
• High BP, Hernia, Pregnancy, Menstruation, Cronic
Ailments
Lauliki or Nauli:३. अणिपल नौली (िुोु ट िमण)
• मध्य नौली: After applying
Uddiyan, increase pressure on
hands to take out middle
portion of abdomen
• दतिण नौली:(Right side): increase
pr. On Right hand to take out
Right side muscles.
• वाम नौली:(Left side) : increase pr.
On left hand to take out Lt.side
muscles.
Nauli Chalan: नौली चालन
⬧ उÄÆ∙यान - दमिण नौली - िध्य नौली - िाि नौली - उÄÆ∙यान
⬧ उÄÆ∙यान - िाि नौली - िध्य नौली - दमिण नौली - उÄÆ∙यान
⬧ िर्जयय: Contra Indication
⬧ दुबयल, अशक्त, हृद पगी, अरेंमडक्स, रेट िें ददय
⬧ लाभ : Benfits
⬧ Very effective on Sluggish liver, gases,
indigestion, etc.
⬧ Increase in functioning of Abdominal organs
⬧ Abdominal muscles-bundles strengthening, fat
minimizes
⬧ Flexibility of Abdominal coverings, chest and
diaphragm muscles improves
Nauli / Nauli-chalan:
Contra Indication
• Constipation, loose stomach
• In hurry
• Piles, Fever, Tuberculosis
• Lungs infection or bad breath
• High BP, abdominal surgery, hear disease,
hernia, gallstones, or peptic ulcer
• During pregnancy
Nauli / Nauli-chalan: General benefits
• Strengthens Rectus Abdomenis. Delays Aging,
destroys fear of death, strongest digestive power,
no accumulation of Fat
• Beneficial for women, it may rectify a displaced
uterus, Madhyama nauli for slightly tilted uterus
• Strengthen Intestinal Peristalsis, restore flexibility
and tone
• Helps to alleviate diabetes
• Prevents Hernia (if someone suffers, shouldn’t do)
• It tones abdominal muscles, nerves, intestines,
reproductive, excretory and urinary organs
• All disorders of doshas
• Balances the endocrine system
• Helps to control the production of sex hormones
Nauli / Nauli-chalan: General benefits
• Speeds up blood circulation
• Reduces blood stagnation
• Alleviating acidity, flatulence, depression,
sexual and urinary disorders, laziness,
dullness, lack of energy and emotional
disturbances
• Helps in control of appetite and sensual
desires
• Strengthen the willpower
• Rejuvenates the pranic energy
• Direct influence Manipur Chakra trigger point
त्राटो – एोाग्रता ोी गुरुचाबी
सिव इमरियाणाि् नयनि् प्रधानि् |
त्राटो ोी व्याख्या
अटात् त्रायते ईतत त्राटकं ।
भ्रमण करनेवाले मन का रक्षण
(protect mind from wandering)
तनरीक्षेतननश्चलदृशा सूक्ष्मलक्ष्यं समाततत: ।
अश्रुसंपात पययनतम् आचाये त्राटकं स्मृतम् त.प्र. २.३१
Looking intently with an unwavering gaze at a small
point until tears are shed is known as Trataka by
the Acharyas (Teachers)
त्राटो
 Why is it Shuddhikriya ?
त्राटक शुतितिया क्यों तै ?
नेत्र शुति के साथ साथ गांधारी और ततस्त तिव्ता नाडीयों की भी शुति तोती तै
| िो तमारी दोनों आखों के साथ िुडी तुई तै |
त्राटो ोे प्रोा
सुदू त्राटो – (जैसे ोी उदय हपता हुआ सुयव)
त्राटो ोे प्रोा
सिीर त्राटो – (जैसे ोी िपिब्ी
ोी ज्यपत), ज्यपत, मबंदु, िूमतव, सूयव,
चरि, ॐ,
त्राटो ोे उर प्रोा
 अ) बाह्य त्राटो (खुली आंखप से)
 ब) आंत त्राटो (बंद आंखप से)
त्राटो ो ने ोी तोनीो
त्राटो ो ने ोे रहले आँखप ोा सूक्ष्ि व्यायाि ो ना लाभदायी है.
मथि औ मिमिल बैठो
ध्येय मिषय १.५ से २ फ़ीट ोी दू ी र औ नज ोे मिथता िे हप.
दृष्टा (दिवो)
दृश्य,
दिवन
त्राटो मोसे नहीं ो ना है
दृमष्ट दपष या आखों िे मिोा हप
आंखप िे ज्यादा नंब हप, ग्लुोपिा हप, लेरस रहना हप
स ददव हता हप
मिगी ोी तोलीफ िालप ोप िपिब्ी रे त्राटो नहीं ो ना है.
सुचना
चश्िा मनोालो त्राटो ोा अभ्यास ऊ्ि है । मफ़ भी डाँक्ट ोी
सलाह लेना उमचत है
ोिजप नेत्र ज्यपमत िालों ोप इस साधना ोप िनैैः-िनैैः िृमिक्रि िें
ो ना चामहए
ज्यपमत त्राटो
अंतज्योमत: बमहज्योमत: प्रत्यो ज्यपमत: र ात्र ि् ।
ज्यपमतवज्यपमत: थियंज्यपमत: आत्िज्यपमत मििपमथिहि् ॥
(ब्रह्म ज्ञानािमलिाला )
त्राटो ोे लाभ
िा ीर ो औ िानमसो थिाथ्य प्राप्त हपता है
नेत्र / नामियों ोी िुमि ो ोे आंखप ोे दपष, नेत्र गपलो ोे
मिोा दू हपते है
घ्येय मिषयों ोे गुणों ोा ज्ञान हपता है, मदव्य िथटी प्राप्त हप ती है
िमथतष्ो िें अल्फा त ंगे बढती है
एोाग्रता, थि णिमोत, संोल्र िमि बढती है
प्रत्याहा , ध्यान िें प्रिेि (अरत ंग यपग ोी औ प्रिास)
मिद्यामिवयों ोा रढाई िें ध्यान बढ़ाता है औ आत्ि मिश्वाि बढ़ता है
त्राटो
आध्यामत्िो लाभ
▪शाम्भवी की तसति प्राप्त तोती तै
▪तमो गुण कम कर देता तै और रिो गुण बढ़ता तै
▪त्राटक एकाग्रता और भीतरी दृश्य, इन क्षमताओंको तवकतसत करता तै।
▪व्यति अंतमुयखी तो िाता तै
▪त्राटक धारणा की एक तकनीक तै
▪त्राटक की मदद से ध्यान करने के तलए तैयार तो सकते तैं
▪एक व्यति त्राटक का अभ्यास करके आत्म बोध प्राप्त कर सकता तैं
▪त्राटक का अभ्यास आज्ञा चि िगा सकता तै
त्राटो
• अवसाद (depression), तचंता, भय, असुरक्षा, अतनद्रा, एलिी,
आसनीय समस्याके तलए तचतकत्सा के तौर पे तकया िा सकता तै.
• भ्रम, संघर्य, तनाव, मन ध्यान कें तद्रत करने के तलए और कोतशकाओं
को आराम के तलए सबसे प्रभावी तकनीक तै.
ोरालभामत
• ोराल यामन भाल, भामत यामन चिोना. जप मक्रया ोराल ोप
चिोाती है, तेजथिी बनाती है िप मक्रया है ोरालभामत.
ोरालभामत
िातक्रि जलक्रि
व्युतक्रि िीतक्रि
ोरालभामत
िात्क्रिेण व्युत्क्रिेण िीत्क्रिेण मििेषत: |
भालभामत मत्रधा ोु यावत्ोफ़दपष मनिा येत || घे.सं. १.५५ ||
Vaatkrama, vyutkrama and sheetkrama are
the three types of bhalbhati (kapalbhati).
Practising them eliminates phlegm and
mucus from the body.
ोरालभामत / भालभामत / िथतोभामत
⬧ कपाल – कपाल गुता
⬧ सप्त पथ
⬧ फेफड़े, श्वासपटल, वायुकोतिका, लतसका ग्रतनथ
⬧ रेचक – िागरूकता के साथ, पूरक – सति
⬧ श्वसन तनयंत्रण – अधय अनैतछिक
⬧ रि में CO2 का प्रमाण कम तोता तै
⬧ सति कुम्भक
ोरालभामत ोै से ो नी है
• दोनों नाक से बारी बारी श्वसन मागय की शुति कर ले
• सुखासन, मेरुदंड को सीधा रखकर बैठे
• पेट के भाग को झटका देकर रेचक करे ५ से ७ बार से बढ़ते तुए १२०
तक
• तसफय पेट की तलनचलन, िाती को तस्थर रखे
ोरालभामत मोसे नहीं ो नी
• High B.P., Heart Problem
• Ulcer, Fever, Constipation, Hernia
• Excessive restlessness
• Pregnancy
• Extremely hot weather, When dehydrated
• Suffering from irritability or anger
• If nose is blocked or during cold n cough
• Insomnia
ोरालभामत ोे लाभ
▪श्वसन प्रणाली, नातसका मागय और साइनसाइतटस शुि करता तै
▪ब्रोतनकयल ट्यूबों में मरोड़ कम करता तै
▪अस्थमा से िुटकारा तदलाता तै और कुि समय में ठीक तकया िा
सकता तै
▪वातस्फीतत, ब्रोंकाइतटस, क्षय रोग को ठीक तकया िा सकता तै
▪रि की अशुतियों बातर करता तै
▪बैक्टीररया के प्रिनन के तलए एक उपयुि िगत का नाश करता तै
▪फेफड़े अछिी तरत से तवकतसत, सीओ2 काफी तद तक बातर फेंक देता
तै
ोरालभामत ोे लाभ
▪ पूणय स्वास््य में सुधार, पेट की चबी कम कर देता तै, चेतरे और
माथे चमक बढ़ाता तै
▪ पेट के अंगों की मातलश, गैस और कब्ि को खत्म करता तै
▪ इडा और तपंगला नाडी का शुतिकरण तोता तै.
▪ सति कुम्भक की अनुभूतत
व्युत्क्रि
नासाभ्यां जलिाोृ ष्य रुनिवक्त्रेण ेचयेत |
रायं रायं व्युत्क्रिेण श्लेष्िदपष मनिा येत् || घे.सं. १.५८ ||
तंत्र:
• पूणय रेचक
• बाह्य कुम्भक
• पूरक (पानी नाक से अंदर)
• मुंत से बातर तनकालना
• तबंदु चि िागृत
• खेचरी के अंशत: लाभ
व्युत्क्रि
शीत्िम
िीत्ोृ त्य रीत्िा िक्त्रेण नासानाले मि ेचयेत् |
एबिभ्यासयपगेन ोािदेिसिपभिेत् || घे.सं. १.५९ ||
तंत्र:
• मुंत से पानी अंदर लेना
• गदयन पीिे और ठोड़ी नीचे करे
• रेचक नाक से
• लाभ: कफ़दोर् तनवारण, चतेरे पर कांतत, स्वायत्त
तंतत्रका प्रणाली (Autonomic nervous system)
पर तनयंत्रण
सा ांि
िुमिमक्रया आजोी आिश्योता
थिाभामिो तह मिषा ी िव्य ोप बाह मनोालने ोी मक्रया हिा े
ि ी िे तीन रुर से हपती है
१) उच्छिास ोे द्वा ा - िायु रुर िे
२) िुत्र औ रसीने ोे द्वा ा - प्रिाही रुर िे
३) िल ोे द्वा ा - घन थिरुर िे
यपग िे ि ी िुमि, नाडी िुमि, औ मच् िुमि ोा िहत्ि है. औ
उसोे मलए िुमिमक्रया ो ना आिश्यो है | औ यह ोै से ो नी है
उसोा िणवन घे ंड संमहता िे एो श्लपो द्वा ा बताया गया है |
धौततबयतस्त स्तथा नेतत लौतलकी त्राटकं तथा ।
कपालभातत श्चैतातन र्ट्कमायतण समाचरेत् ।। १.१२ ।। (घेरंड संततता)
१. घौतत
२. बतस्त
३. नेतत
४. लौतलकी
५. त्राटक
६. कपालभातत
इन सभी शुतितियाओ के बारेमे तमने िानकारी ली तै
“सिे पगा: प्रजायरते जायरते िल संचयात्।"
भािािव: ि ी िे संमचत िल दू ो ने से सिथत पग मनोल जाते है
औ ि ी मन पगी बनता है
Yogic Shuddhikriya
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  • 1. घंटाली मित्र िंडल, घाटोपर यपग रदमिोा अभ्यास क्रि
  • 2. Understanding the Shatkarmas Definition and Classification 1. What are the Shatkarmas? 2. How are they Classified? 3. What is the support of Kriya? 4. Are there any other kriyas beside these? Next
  • 3. धौमिर्बमतितिथा नेमि लौमलोी त्राटों िथा । ोरालभामिश्चैिामन षट्ोिाबमि सिाच ेि् ॥ १ ॥ १२ ॥ dhautirbastistathā neti laulikī trāṭakaṁ tathā | kapālabhātiścaitāni ṣaṭkarmāṇi samācaret || G.S.1 || 12 || Dhauti, Basti, Neti, and Nauli, Trataka, and Kapalabhati, One should practice these six cleansing techniques regularly षट्ोिबिा शपधनं च आसनेन भिेद् दृढि्। िुद्रया मतथ िा चैि प्रत्याहा ेि धैयबिा ॥ १ ॥ १०॥ ṣaṭkarmaṇā śodhanaṁ ca āsanena bhaved dṛḍham | mudrayā sthiratā caiva pratyāhāreṇa dhairyatā || 1 || 10 || Through Shatkarmanas purification of body and through Asanas firmness, through Mudras steadiness, and through Pratyahara patience is achieved. घे ंड संमहिा – Gherand Sanhita Back
  • 4. DHAUTI Antar dhauti (Internal) Vatsara (air) Varisara (shankhaprakshalana) Vanhisara (agnisara kriya) Bahishkrita (rectal cleaning) Danta dhauti (head) Dantamoola (teeth) Jihva (tongue) Karnarandhra (ears) Kapalrandhra (frontal sinuses) Hrid dhauti (cardiac) Danda (stick) Vaman (kunjal, gajakarani & vyaghrakarani kriya) Vastra (cloth) Mool Shodhana (anal) Prakshalana
  • 5. BASTI Jala (water) Sthala (dry) NETI Jala (water) Sutra (thread / rubber) LAULIKI (NAULI) Madhyama (middle) Vama (Left) Dakshina (right) Bhramara (abdomen / Naulichalana) TRATAKA Bahiranga (external) Antaranga (Internal) KAPALBHATI Vatakrama (breathing) Vyutkrama (reversed) Sheetkrama (cooling) Back
  • 6. ग्रन्थ प्रोा १. हठयपग प्रदीमरोा 6 २. घे ंड संमहिा 21 ३. हठ त्नािली 8 ४. षटोिब संग्रह 46 ५. प्राििपमशनी 5 ६. आयुिेद 5 ७. भमिसाग – च िदास 12 Back
  • 7. Purpose 1. Should everyone practice? 2. What is the ultimate purpose? 3. What is its role in overall Yoga? 4. What are subtle effects? 5. What is the best way to maintain a healthy bodily systems? 6. How it helps to increase in capacity? 7. What is its effect on doshas? 8. How does it balance the body? 9. Is it necessary to do it before Pranayama? Next
  • 8. मूल ऊद्देश कुण्डललनी शलि जागरण हाल के समय में शरीर की आतंररक शुलि
  • 9. अशुमियााँ ोौन से ति र उत्रन्न हपिी है 1. Food - खप ाो 2. Breathing - श्वसन 3. Skin - त्िचा 4. ANS - अनुों री – र ानुों री 5. Body Systems - संतथा – अंि:स्त्रािी, प्रमि क्षा, उत्सर्बन, प्रर्नन 6. आि 7. Mental / Emotional Level ोाि, क्रपध, िपह, िद, लपभ, ित्स 8. िृमियााँ, - रिंर्मल िुमन Back
  • 10. Space - आोाश Air - िायु Fire - अमनन Water - र्ल Earth - रृथ्िी ोु मरिानां मह दपषािां श ी े रर धाििाि् । यत्र संग: ख िैगुण्याि् व्यामधतित्रपरर्ायिे ।।सुश्रुत संहिता 24/10 The prakupita doshas will spread all over the body, where there is a hindrance dosha will accumulate there and produce disease Back
  • 11.  Increase in Flexibility - श ी ोा लौमचो हपना  Decrease in Weight - िर्न ोा ोि हपना  Filling with Vivace - श ी ोा तफू मिब से भ ना  Decrease in restlessness - िन ोी चंचलिा ोि हपना  Remove/Reduce Disease - पगपोा ोि हपना/ चला र्ाना  Change in Attitude - दृमिोपि िें रर ििबन Does This Happens Overnight ??? क्या ये सर् एो मदन िें संभि है ?
  • 12. Benefits 1. Is it important for Kundalini awakening 2. Cleanses the internal body 3. Body waste and overall health. 4. Concentration 5. Advanced practices 6. Preparation for Pranayama and meditation 7. Eliminating disease 8. Lengthen the life-span Next
  • 13. ‘A State of Complete physical, Mental, Social and Spiritual Well Being and not merely Absence of Disease or Infirmity’ - WHO तिमतिन् मिष्ठमि इमि तितथः। र्प तियं िें मतथि है िही तितथ है। आयुिेद सिदपष: सिामननश्च सिधािुिलमक्रया । प्रसन्न आत्िेमन्द्रयिन: तितथ इत्यमभमधयिे ॥ सुश्रुि १५.१० ॥ Back
  • 14. So how to achieve the Goal :- Only way is YOGA यपग :- देहानंद से मदव्यानंद | देहशुमि→नाडी शुमि →मचि शुमि →मिचा शुमि By Sivanand Saraswati Back
  • 15. Shatkarmas and Pranamaya Kosha 1. Five koshas of the body 2. Main purpose 3. Waste interfere with Pranic body 4. Shatkarmas affects Pranic body 5. Purifying Nadis 6. Balancing the Nadis 7. Preparation for Pranayama Next
  • 16. Health is integration of all the five Back ▪ आनंदिय ▪ मिज्ञानिय ▪ िनपिय ▪ प्राििय ▪ अन्निय
  • 17.  ोायब - प्रािशमि ोा िहन  तथान - संरूिब श ी िें, प्राििय ोपषप िें  संख्या - ७२००० नामियााँ Back
  • 19. प्रमुख नालियााँ, उनका स्थान और संबंलित शुलि लरियया रिय. प्रमुख नाडी शरीर में स्थान संबंलित शुलिलरियया १ इडा बाई ंओर कपालभालत, नेलत २ लपंगला दाई ंओर कपालभालत, नेलत ३ सुषुम्ना मेरुदंड (मध्य मे) कपालभालत, नेलत ४ गांिारी बाएं नेत्र गोलक में त्राटक, कपालभालत ५ हलस्त लजव्हा दाएं नेत्र गोलक में त्राटक, कपालभालत ६ पूषा दायााँ कान कणण रंध्र िौलत ७ यशलस्िनी बायााँ कान कणण रंध्र िौलत ८ अलंबुिा मुख पर लजव्हामूल, दंतमूल, कपालभालत ९ कुट्टू गुदा द्वार बलस्त, गजकरणी, गणेश लरियया १० शंलखनी मूल स्थान बलस्त, गजकरणी, गणेश लरियया ११ सरस्िती मुख, कं ठ लजव्हामूल, कपाल रंध्र १२ शलि गुदा द्वार, दाई ंओर बलस्त १३ िज्र गुदा द्वार, बाई ंओर बलस्त
  • 20. General Guidelines 1. Ideal environment for practicing Shatkarmas? 2. How should one learn? – Guidance - Guru 3. Should everyone practice to balance doshas? 4. Necessary to change lifestyle when taking up hatha yoga? 5. Are there any restriction on women during menses? 6. What diet should be followed? 7. What is the correct sequence – timing – season? 8. What apparatus needed? 9. Should it be practised before Pranayama? 10. How can it be fitted in busy lifestyle? 11. Awareness NEXT
  • 22. The only part of yoga which not only give result In short time, but it gives result instant. यह यपग ोा िप महतसा है र्प न मसफ ब र्ल्दी से रर िाि लािा है र्मल्ो िु ंि रर िाि लािा है |
  • 23. िेदश्लेष्िामधोः रूिं षट्ोिाबमि सिाच ेि् । अन्यतिु नाच ेिामन दपषािां सिभाििः ॥ २.२१ ॥ meda-śleṣhmādhikaḥ pūrvaṃ ṣhaṭ-karmāṇi samācharet | anyastu nācharettāni doṣhāṇāṃ samabhāvataḥ || 21 || When fat or mucus is excessive, shatkarma: the six cleansing techniques, should be practised before (pranayama). Others, in whom the doshas, i.e. phlegm, wind and bile, are balanced should not do them.
  • 24. ोिब षट्ों इदं गपप्यं घटशपधनोा ोि् । मिमचत्रगुिसन्धाय रूज्यिे यपमगरुङ्गिैः ॥ २.२३ ॥ karma ṣhaṭkamidaṃ ghopyaṃ ghaṭa-śodhana-kārakam | vichitra-guṇa-sandhāya pūjyate yogi-pungghavaiḥ || 23 || These shatkarmas which effect purification of the body are secret. They have manifold, wondrous results and are held in high esteem by eminent yogis.
  • 25. षट्ोिबमनगबितथौल्योफदपषिलामदोः । प्रािायािं ििः ोु याबदनायासेन मसद््यमि ॥ २.३६ ॥ ṣhaṭ-karma-nirgata-sthaulya-kapha-doṣha-malādikaḥ | prāṇāyāmaṃ tataḥ kuryādanāyāsena siddhyati || 36 || By the six karmas, (shatkarmas), one is freed from excesses of the doshas. Pranayama can then be practised and success achieved without strain.
  • 26. प्रािायािै ेि सिे प्रशुष्यमन्ि िला इमि । आचायाबिां िु ोे षांमचदन्यत्ोिब न संििि् ॥ २.३७ ॥ prāṇāyāmaireva sarve praśuṣhyanti malā iti | āchāryāṇāṃ tu keṣhāṃchidanyatkarma na saṃmatam || 37 || According to some teachers, pranayama alone removes impurities and therefore they hold pranayama in esteem and not the other techniques.
  • 28.  Means ‘to wash’  िुखद्वा से िलद्वा ो (संरूर्ण रचन िागण)  Alimentary canal, inner walls of stomach, intestines and bowel  Ears, forehead and teeth
  • 29. प्रोा उरप्रोा • आं धौम १. िा सा २. िार सा ३. िमहिसा (अमननसा ) ४. बमिस्ोृ ि् • दं धौम १.दं िूल २. मिव्िािूल ३. ोर्ण ंध्र ४. ोराल ंध्र • हृद धौम १. ििन २. िस्त्र ३. दंड ४. व्याघ्रो र्ी ५. गिो र्ी • िूलशपधन / गर्ेशमक्रया अह धौम दणह धौम हृणद्धौम िूणलशपधनि् धौम ं च ुमिणधां ोृ त्िा घटं ोु िणह ु मनिणलि् घे.सं.१.१३
  • 30. ोफ़ – रचन – उत्सिणन १. ोाोी िुद्रा २. िायु भक्षर् – ३० से ३५ बा ३. नौली चालन ४. मिसिणन (िुख से या गुदा द्वा से) लाभ – १. दूषित वायुओंका षवसर्जन, hyperacidity, heartburn २. पचन और उत्सर्जन षिया में सुधार ३. कफ़ और षपत्त के रोगों का षनवारण ४. आलस्य में कमी, उत्साह बढ़ता है Contra: Heart attack in the past २-३ years, or surgery
  • 31. आं धौम : २. िार सा (शंख प्रक्षालन) ोायाोल्र  िार = रानी, सा = आगे स ोाना  शुमद्ध – िुखिागण से िलिागण  गुनगुना रानी – २ मगलास – नौलीचालन / ियू ासन  मिोल्र: ाड़ासन, म यणो ाड़ासन, ोटी चक्रासन, म यणो भुिंगासन, उद ाोर्णर् (ोौआचाल)  िर्जयण १. ह्रदय और षकडनी दोि २. उच्च रक्तचाप ३. मेडीकल कं डीशन ४. गर्ाजवस्था
  • 32. आं धौम : २. िार सा (शंख प्रक्षालन) ोायाोल्र  लाभ १. अपचन, कब्ज़, मलावरोध, गैस से छुटकारा २. बवासीर, नासूर, अंतषडयों की शुषि के षलए उपयुक्त ३. मधुमेह पर उपचारक ४. आंते में मौर्ूद वर्मसज से छुटकारा ५. प्रसन्न आत्मेंषिय मन: ६. शरीर - षदव्य प्रषतर्ावान तेर्स्वी हलका बनता है
  • 33.  ेि त्त्ि (Usage of Fire Element).  Practice after mastering Uddiyan  Technique: Flapping of Abdominal muscles 10-15 to 100times after exhalation and holding breath
  • 34. Benefits (लाभ):  Gives nice massage to Liver, Spleen, Pancreas, Stomach  Improves ◦ Appetite, ◦ Digestion, ◦ Excretion, ◦ Constipated state, ◦ Weight management and ◦ Reproductive functions Contra-indications (िर्जयण) : • High BP, • Hernia, • Pregnancy, • Menstruation, • Cronic Ailments
  • 35. िा सा िैसी ोृ म कृषत: मुख से वायु का उदर में पान करे, षिर उस वायु को डेढ़ घंटे तक पेट मे धारण षकये रहे । तत्पश्चात् गुदामागज द्वारा बाहर षनकाल दे । लाभ: १. वातसार और वाररसार के र्ैसे ही षकं तु अषधक मात्र में
  • 36. सामग्री - खैर का रस, वस्त्र से छन्नी षमट्टी / राख / मंर्न, दातून (नीम या बबूल का), षत्रिला चूणज, टूथपेस्ट षिया – १. दााँतों को षघसना - दााँतों की सिाई २. दोहन – तर्जनी या अंगूठे की मदद से मसूड़ों की माषलश करना लार्: १. दांत और मसूड़े साि और सुदृढ़ बनते हैं २. मसूड़ों में रक्ताषर्सरण सुधरता है ३. अन्नपचन में मददगार ४. दााँतो में र्ंतुओ का प्रर्ाव / िैलाव कम होता है
  • 37.  र्ीर् और इसकी र्ड़ की सिाई  षिया – १. िामलश - तर्जनी, मध्यमा और अनाषमका की मदद से र्ीर् की र्ड़ तक माषलश करे २. दपिन – अंगूठे औ िणनी ोी िदद से लाभ १. र्ीर् लचीली बनती है २. पचन में सुधार ३. खेचरी मुिा की तैयारी ४. अलंबुधा और सरस्वती नाषड़यों की शुषि
  • 38.  िणनी औ ोमनष्ठ ोी िदद से  लाभ १. बाहरी कानों की शुषि २. नादानुसंधान ३. यशषस्वनी और पूिा नाषड़यों की शुषि
  • 39.  ोराल = forehead / ललाट, ंध्र = गुिा  ोृ म – िृदु ालु ोा अंगठे से िदणन / िामलश  लाभ – १. कफ़दोि से मुषक्त २. ज्ञानतंतु उत्तेषर्त ३. अलंबुधा और सरस्वती नाषड़यों की शुषि
  • 40. ििन नैसमगणो आरपआर प्रयत्नरूिणो िायु िल  (ANS) अनैमछिो िर्जिासंस्था र मनयंत्रर्  नैसमगणो ििन: संिेदना िमत स्ो से  आंत्रलि : Peristaltic Movement  प्रम आंत्रलि : Anti Peristaltic Movement
  • 41.  िर्जयण: १. उच्च रक्तचाप (उषचत देखर्ाल करके ) २. हृदयरोग, टी.बी. ३. हषनजया ४. आंखों की तकलीि के साथ मधुमेह  लाभ १. मनोषनयंत्रण २. षपत्त और कफ़ दोि से मुषक्त ३. दमा में सुधार ४. पचन में सुधार, बिकोष्टता में कमी
  • 42. अल्रश्रिी सायफन ोे त्त्ि रा म्रर ो रद्धम : ोे ल, बे , िल्दी ोे दण्ड, िट िृक्ष ोी िटा ोृ म : १ से.िी. िपटी, औ ८० से.िी. लंबी ब नली लाभ: १. वमन धौषत के सर्ी लार् २. दमा र्ैसे रोगों पर उपचारक
  • 43.  िलिल ोा िस्त्र ४ उंगली (८ से.िी.) चौड़ा , १५ िाथ (७ िीट ) लंबा  ३ सपरान िें ोृ म ो ें | ◦ िस्त्र मनगलना ◦ नौली, उड्मडयान मक्रया ◦ िस्त्र धी े धी े बाि मनोालना
  • 44.  िर्जयण १. हायपरटेंशन, ह्रदय षवकार, स्रोक, पेषटटक अल्सर, सूर्न, कमर्ोरी, बीमारी, गर्ाजवस्था  लाभ १. दमा के षवकार पर योगोपचार २. त्वचा के षवकार , कफ़, षपत्त ३. पचन शषक्त बढाता है ४. कुष्ठरोग
  • 45.  ििन िैसे िी र ह ु रुो रुो ोे रानी बाि मनोालना  रेट र दाब, िुख िें ऊँ गली डाले मबना उल्टी ो ने ोी ोल्रना ो ना  ANS र मनयंत्रर्  लाभ: १. वमन के ज्यादातर लार् षमलते है २. गर्करणी षिया की पूवज तयारी
  • 46.  उल्टी ोी भािना, ोामडणयाो मस्फं ोट  एमरनलपमटस िाल्ि एो िी सिय खुल े िै  अरान िायु गले ो लाना  लाभ १. यकृत, टलीहा, अग्नाशय कायजक्षम २. वमन और व्याघ्रकरणी के ज्यादातर लार् षमलते है ३. शंषखनी नाडी उत्तेषर्त
  • 47.  लाभ: १. गुदा द्वार पर रक्ताषर्सरण बढ़ता है २. मलावरोध में कमी ३. बवासीर, नासूर, अंतषडयों की सुर्न पर प्रषतबंधक ४. स्नायुओंका मसार्, संवेदनक्षमता का षवकास ५. कुट्टू नाडी की शुषि
  • 48. (गुदा द्वा ोा भाग बाि मनोालो उसे रानी से धपना) लाभ: १. गुदाद्वार का आरोग्य सुधरता है और वहां की नाषड़यों की छोर सक्षम होती है २. अन्तस्त्व की शुषि ३. मल षवसर्जन का षनयंत्रण ऐषच्छक होता है
  • 49. बमति Basti: Yogic Enema प्रसन्न आत्िेंमिय िन: | १. जल बमति या िार बमति Jala Basti २. तथल बमति या शुष्ो बमति,िाि बमति, िायु बमति Sthala Basti
  • 50. PROCESS ▪ In the Morning, before breakfast ▪ Utkatasana under water up to waist ▪ Rechak-Nauli Chaalan-Uddiyan ▪ Water flows in due to -ve Pressure ▪ Excretion thr’ abonite pipe ▪ It is the best technique for cleansing the Large Intestine बमति Basti: Yogic Enema
  • 51. CONTRA INDICATIONS ▪ High bp, ▪ Hernia, ▪ Piles problems, ▪ disorder related to digestion, ▪ Should not be done during Cloudy, Windy or stormy weather बमति Basti: Yogic Enema
  • 52. BENIFITS ▪ Constipation, diarrhea, Improves blood circulation in large intestine ▪ Cures diseases of the bowels ▪ Excess Doshas (tri) are destroyed ▪ Body’s Internal heat reduces ▪ One feels active and dynamic after Basti ▪ Body Glows, Basti makes body Beautiful ▪ Mind Purified बमति Basti: Yogic Enema
  • 53. NETI- KRIYA : नेमि मदव्य दृमि प्रदामयनी नासपमि मश सा द्वा ं | • Impact on Sapta-path, Eyes, Resp.track • Regular Breathing, Network of Capillaries • Nose is Barometer, Olfactory nerves • Stimulates Ida, Pingala nerve-tips • Expansion of awareness at subtler level साधनान्नेमिोाययतय खेच ीमसमििाप्नुयाि् | ोफ़दपषा मिनष्यमन्ि मदव्यदृमि: प्रजायिे || घे.सं.१.५१|| By Practicing the Neti-Kriya, one obtains Khechari Siddhi. It destroys the disorders of phlegm and produces clairvoyance or clear sight
  • 54. Types of Neti नेमि Requirements for जलनेति: Sterilized: Neti pot. Lukewarm water, salt, Rubber catheter for Sutra Neti जल सूत्र ( ब ) दुग्थ घृि िेल तििूत्र बेसण
  • 55. ब िेसणनेमि Rubber Vesana Neti ब नेमि Rubber Neti
  • 56. Rubber Neti • Improves functioning of Pineal and inner skin • Improves respiratory capacity • Relief from Sinusitis, rhinitis, Abnormal growth of nasal bone • Other benefits same as Jal-neti on cough, throat, nose and ears
  • 57. Guidelines for Practice • Why should it be practiced even when nose is not blocked? • Duration and best time? • How often should neti be can practiced? • When should neti be avoided? • What precautions are there for the practice? • What is the best posture for practicing Jala neti? • Why is the position of head important when practicing neti? • What should be done if the water won’t flow through the nose?
  • 58. Guidelines for Practice • Which nostril is the water poured / catheter inserted first when practising Neti? • How should beginners develop the practice of Sutra neti? • How are the nostrils dried after jala neti? • Contra-indicated for – Tonsillitis, swelling & other throat problems, – growth in Nostrils – Perforation in nostrils, Nose bleeding
  • 59. Benefits of Neti kriya • Opening and Cleansing of nasal passages • Increased immunity, reduced sensitivity & allergy • Therapy for Infections, Cold, Sinusitis, cataracts, Migraine, Asthma, Bronchitis • Infections of the adenoids, polyps and inflammation of the nasal membrane • Effects of neti on allergy are remarkable
  • 60. Benefits of Jala Neti •Neti is the ENTE practice (Ear, Nose, Throat, Eyes) – biggest ENT doctor in the world •Temperature, force and flow of water stimulates the nerves located in and around nostrils and the upper throat •Removes impurities, dust and dirt of mucous membrane •Reduces hearing loss and Increases hearing capacity •Removes Eye-disorders like short-sightedNess, catarrh, •Prepares for the practice of Pranayama and Khechari Mudra •Destroys the multitude of disease in the region above the clavicle
  • 61. १.Uddiyan (नौली ): • Practice Sulabha Tadagimudra and Uddiyan before Nauli kriya • Area: Abdominal cavity • Use of Space element (आोाश ित्ि, बाह्य ोु म्भो) • Technique: Hold breath after exhalation, expanding chest, suck abdomen in • Contra-indicated for High bp, Menstruation Heart problems • Benefits: Improves Digestion, Constipation, improves working and secretion of Adrenal and other Abdominal Glands
  • 62. २. िमिसा (अमग्नसा ) • िेज ित्त्ि (Usage of Fire Element). Practice after mastering Uddiyan • Technique: Flapping of Abdominal muscles 10-15 to 100times after exhalation and holding breath Benefits (लाभ): • Gives nice massage to Liver, Spleen, Pancreas, Stomach • Improves Appetite, Digestion, Excretion, Constipated state, Weight management and Reproductive functions Contra-indications (िर्जयय) : • High BP, Hernia, Pregnancy, Menstruation, Cronic Ailments
  • 63. Lauliki or Nauli:३. अणिपल नौली (िुोु ट िमण) • मध्य नौली: After applying Uddiyan, increase pressure on hands to take out middle portion of abdomen • दतिण नौली:(Right side): increase pr. On Right hand to take out Right side muscles. • वाम नौली:(Left side) : increase pr. On left hand to take out Lt.side muscles.
  • 64. Nauli Chalan: नौली चालन ⬧ उÄÆ∙यान - दमिण नौली - िध्य नौली - िाि नौली - उÄÆ∙यान ⬧ उÄÆ∙यान - िाि नौली - िध्य नौली - दमिण नौली - उÄÆ∙यान ⬧ िर्जयय: Contra Indication ⬧ दुबयल, अशक्त, हृद पगी, अरेंमडक्स, रेट िें ददय ⬧ लाभ : Benfits ⬧ Very effective on Sluggish liver, gases, indigestion, etc. ⬧ Increase in functioning of Abdominal organs ⬧ Abdominal muscles-bundles strengthening, fat minimizes ⬧ Flexibility of Abdominal coverings, chest and diaphragm muscles improves
  • 65. Nauli / Nauli-chalan: Contra Indication • Constipation, loose stomach • In hurry • Piles, Fever, Tuberculosis • Lungs infection or bad breath • High BP, abdominal surgery, hear disease, hernia, gallstones, or peptic ulcer • During pregnancy
  • 66. Nauli / Nauli-chalan: General benefits • Strengthens Rectus Abdomenis. Delays Aging, destroys fear of death, strongest digestive power, no accumulation of Fat • Beneficial for women, it may rectify a displaced uterus, Madhyama nauli for slightly tilted uterus • Strengthen Intestinal Peristalsis, restore flexibility and tone • Helps to alleviate diabetes • Prevents Hernia (if someone suffers, shouldn’t do) • It tones abdominal muscles, nerves, intestines, reproductive, excretory and urinary organs • All disorders of doshas • Balances the endocrine system • Helps to control the production of sex hormones
  • 67. Nauli / Nauli-chalan: General benefits • Speeds up blood circulation • Reduces blood stagnation • Alleviating acidity, flatulence, depression, sexual and urinary disorders, laziness, dullness, lack of energy and emotional disturbances • Helps in control of appetite and sensual desires • Strengthen the willpower • Rejuvenates the pranic energy • Direct influence Manipur Chakra trigger point
  • 68. त्राटो – एोाग्रता ोी गुरुचाबी सिव इमरियाणाि् नयनि् प्रधानि् |
  • 69. त्राटो ोी व्याख्या अटात् त्रायते ईतत त्राटकं । भ्रमण करनेवाले मन का रक्षण (protect mind from wandering) तनरीक्षेतननश्चलदृशा सूक्ष्मलक्ष्यं समाततत: । अश्रुसंपात पययनतम् आचाये त्राटकं स्मृतम् त.प्र. २.३१ Looking intently with an unwavering gaze at a small point until tears are shed is known as Trataka by the Acharyas (Teachers)
  • 70. त्राटो  Why is it Shuddhikriya ? त्राटक शुतितिया क्यों तै ? नेत्र शुति के साथ साथ गांधारी और ततस्त तिव्ता नाडीयों की भी शुति तोती तै | िो तमारी दोनों आखों के साथ िुडी तुई तै |
  • 71. त्राटो ोे प्रोा सुदू त्राटो – (जैसे ोी उदय हपता हुआ सुयव)
  • 72. त्राटो ोे प्रोा सिीर त्राटो – (जैसे ोी िपिब्ी ोी ज्यपत), ज्यपत, मबंदु, िूमतव, सूयव, चरि, ॐ,
  • 73. त्राटो ोे उर प्रोा  अ) बाह्य त्राटो (खुली आंखप से)  ब) आंत त्राटो (बंद आंखप से)
  • 74. त्राटो ो ने ोी तोनीो त्राटो ो ने ोे रहले आँखप ोा सूक्ष्ि व्यायाि ो ना लाभदायी है. मथि औ मिमिल बैठो ध्येय मिषय १.५ से २ फ़ीट ोी दू ी र औ नज ोे मिथता िे हप. दृष्टा (दिवो) दृश्य, दिवन
  • 75. त्राटो मोसे नहीं ो ना है दृमष्ट दपष या आखों िे मिोा हप आंखप िे ज्यादा नंब हप, ग्लुोपिा हप, लेरस रहना हप स ददव हता हप मिगी ोी तोलीफ िालप ोप िपिब्ी रे त्राटो नहीं ो ना है. सुचना चश्िा मनोालो त्राटो ोा अभ्यास ऊ्ि है । मफ़ भी डाँक्ट ोी सलाह लेना उमचत है ोिजप नेत्र ज्यपमत िालों ोप इस साधना ोप िनैैः-िनैैः िृमिक्रि िें ो ना चामहए
  • 76. ज्यपमत त्राटो अंतज्योमत: बमहज्योमत: प्रत्यो ज्यपमत: र ात्र ि् । ज्यपमतवज्यपमत: थियंज्यपमत: आत्िज्यपमत मििपमथिहि् ॥ (ब्रह्म ज्ञानािमलिाला )
  • 77. त्राटो ोे लाभ िा ीर ो औ िानमसो थिाथ्य प्राप्त हपता है नेत्र / नामियों ोी िुमि ो ोे आंखप ोे दपष, नेत्र गपलो ोे मिोा दू हपते है घ्येय मिषयों ोे गुणों ोा ज्ञान हपता है, मदव्य िथटी प्राप्त हप ती है िमथतष्ो िें अल्फा त ंगे बढती है एोाग्रता, थि णिमोत, संोल्र िमि बढती है प्रत्याहा , ध्यान िें प्रिेि (अरत ंग यपग ोी औ प्रिास) मिद्यामिवयों ोा रढाई िें ध्यान बढ़ाता है औ आत्ि मिश्वाि बढ़ता है
  • 78. त्राटो आध्यामत्िो लाभ ▪शाम्भवी की तसति प्राप्त तोती तै ▪तमो गुण कम कर देता तै और रिो गुण बढ़ता तै ▪त्राटक एकाग्रता और भीतरी दृश्य, इन क्षमताओंको तवकतसत करता तै। ▪व्यति अंतमुयखी तो िाता तै ▪त्राटक धारणा की एक तकनीक तै ▪त्राटक की मदद से ध्यान करने के तलए तैयार तो सकते तैं ▪एक व्यति त्राटक का अभ्यास करके आत्म बोध प्राप्त कर सकता तैं ▪त्राटक का अभ्यास आज्ञा चि िगा सकता तै
  • 79. त्राटो • अवसाद (depression), तचंता, भय, असुरक्षा, अतनद्रा, एलिी, आसनीय समस्याके तलए तचतकत्सा के तौर पे तकया िा सकता तै. • भ्रम, संघर्य, तनाव, मन ध्यान कें तद्रत करने के तलए और कोतशकाओं को आराम के तलए सबसे प्रभावी तकनीक तै.
  • 80. ोरालभामत • ोराल यामन भाल, भामत यामन चिोना. जप मक्रया ोराल ोप चिोाती है, तेजथिी बनाती है िप मक्रया है ोरालभामत. ोरालभामत िातक्रि जलक्रि व्युतक्रि िीतक्रि
  • 81. ोरालभामत िात्क्रिेण व्युत्क्रिेण िीत्क्रिेण मििेषत: | भालभामत मत्रधा ोु यावत्ोफ़दपष मनिा येत || घे.सं. १.५५ || Vaatkrama, vyutkrama and sheetkrama are the three types of bhalbhati (kapalbhati). Practising them eliminates phlegm and mucus from the body.
  • 82. ोरालभामत / भालभामत / िथतोभामत ⬧ कपाल – कपाल गुता ⬧ सप्त पथ ⬧ फेफड़े, श्वासपटल, वायुकोतिका, लतसका ग्रतनथ ⬧ रेचक – िागरूकता के साथ, पूरक – सति ⬧ श्वसन तनयंत्रण – अधय अनैतछिक ⬧ रि में CO2 का प्रमाण कम तोता तै ⬧ सति कुम्भक
  • 83. ोरालभामत ोै से ो नी है • दोनों नाक से बारी बारी श्वसन मागय की शुति कर ले • सुखासन, मेरुदंड को सीधा रखकर बैठे • पेट के भाग को झटका देकर रेचक करे ५ से ७ बार से बढ़ते तुए १२० तक • तसफय पेट की तलनचलन, िाती को तस्थर रखे
  • 84. ोरालभामत मोसे नहीं ो नी • High B.P., Heart Problem • Ulcer, Fever, Constipation, Hernia • Excessive restlessness • Pregnancy • Extremely hot weather, When dehydrated • Suffering from irritability or anger • If nose is blocked or during cold n cough • Insomnia
  • 85. ोरालभामत ोे लाभ ▪श्वसन प्रणाली, नातसका मागय और साइनसाइतटस शुि करता तै ▪ब्रोतनकयल ट्यूबों में मरोड़ कम करता तै ▪अस्थमा से िुटकारा तदलाता तै और कुि समय में ठीक तकया िा सकता तै ▪वातस्फीतत, ब्रोंकाइतटस, क्षय रोग को ठीक तकया िा सकता तै ▪रि की अशुतियों बातर करता तै ▪बैक्टीररया के प्रिनन के तलए एक उपयुि िगत का नाश करता तै ▪फेफड़े अछिी तरत से तवकतसत, सीओ2 काफी तद तक बातर फेंक देता तै
  • 86. ोरालभामत ोे लाभ ▪ पूणय स्वास््य में सुधार, पेट की चबी कम कर देता तै, चेतरे और माथे चमक बढ़ाता तै ▪ पेट के अंगों की मातलश, गैस और कब्ि को खत्म करता तै ▪ इडा और तपंगला नाडी का शुतिकरण तोता तै. ▪ सति कुम्भक की अनुभूतत
  • 87. व्युत्क्रि नासाभ्यां जलिाोृ ष्य रुनिवक्त्रेण ेचयेत | रायं रायं व्युत्क्रिेण श्लेष्िदपष मनिा येत् || घे.सं. १.५८ || तंत्र: • पूणय रेचक • बाह्य कुम्भक • पूरक (पानी नाक से अंदर) • मुंत से बातर तनकालना • तबंदु चि िागृत • खेचरी के अंशत: लाभ
  • 89. शीत्िम िीत्ोृ त्य रीत्िा िक्त्रेण नासानाले मि ेचयेत् | एबिभ्यासयपगेन ोािदेिसिपभिेत् || घे.सं. १.५९ || तंत्र: • मुंत से पानी अंदर लेना • गदयन पीिे और ठोड़ी नीचे करे • रेचक नाक से • लाभ: कफ़दोर् तनवारण, चतेरे पर कांतत, स्वायत्त तंतत्रका प्रणाली (Autonomic nervous system) पर तनयंत्रण
  • 90. सा ांि िुमिमक्रया आजोी आिश्योता थिाभामिो तह मिषा ी िव्य ोप बाह मनोालने ोी मक्रया हिा े ि ी िे तीन रुर से हपती है १) उच्छिास ोे द्वा ा - िायु रुर िे २) िुत्र औ रसीने ोे द्वा ा - प्रिाही रुर िे ३) िल ोे द्वा ा - घन थिरुर िे यपग िे ि ी िुमि, नाडी िुमि, औ मच् िुमि ोा िहत्ि है. औ उसोे मलए िुमिमक्रया ो ना आिश्यो है | औ यह ोै से ो नी है उसोा िणवन घे ंड संमहता िे एो श्लपो द्वा ा बताया गया है |
  • 91. धौततबयतस्त स्तथा नेतत लौतलकी त्राटकं तथा । कपालभातत श्चैतातन र्ट्कमायतण समाचरेत् ।। १.१२ ।। (घेरंड संततता) १. घौतत २. बतस्त ३. नेतत ४. लौतलकी ५. त्राटक ६. कपालभातत इन सभी शुतितियाओ के बारेमे तमने िानकारी ली तै
  • 92. “सिे पगा: प्रजायरते जायरते िल संचयात्।" भािािव: ि ी िे संमचत िल दू ो ने से सिथत पग मनोल जाते है औ ि ी मन पगी बनता है